विज्ञापन
विज्ञापन

World Environment Day 2019: हवा-मिट्टी-पानी पर कब होंगे चुनाव

anil prakash joshiअनिल प्रकाश जोशी Updated Wed, 05 Jun 2019 09:30 AM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : environment
ख़बर सुनें
पर्यावरण के प्रति हम अब भी गंभीर नहीं हुए, इसका पता इसी बात से चलता है कि अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुआ चुनाव हवा, मिट्टी, पानी जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। लेकिन अपने यहां हुए चुनाव में पर्यावरण हाशिये पर रहा। ऑस्ट्रेलिया के चुनाव में पर्यावरण के मुद्दे की प्रमुखता का का कारण यह था कि शताब्दी का सबसे बड़ा सूखा इस बार पड़ा था। वहां के मुरे डार्लिंग नदी तंत्र में दस लाख मछलियां सूखे के कारण मर गईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं दूसरी तरफ क्वींसलैंड में पांच लाख मवेशी बाढ़ में बह गए और जंगल की आग ने वर्षा वनों का बड़ा नुकसान किया। दावानल ने करीब एक लाख 90 हजार हेक्टेयर में फैले वनों को लील डाला। इसलिए वहां के राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों में पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल थे। लेबर पार्टी ने अपने चुनाव प्रचार में वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को 45 फीसदी तक घटाने का दावा किया है। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि वहां चुनाव में पर्यावरण ही सबसे प्रमुख मुद्दा रहा। ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, हाल ही में ब्रिटिश पार्लियामेंट में भी वायु प्रदूषण को लेकर जमकर खींचतान हुई है और आपातकालीन स्थिति की तर्ज पर उपायों पर पहल की बात की गई।

चीन में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर नए सिरे से कमर कसी गई और पिछली ग्लोबल एयर रपट की तुलना में आज बेहतर स्थितियां हैं। चीन दुनिया का वह देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तो तेजी से बढ़ी ही, वह वायु प्रदूषण को लेकर भी गंभीर रहा और उससे मुक्त होने के उपाय भी खोजे। आज बीजिंग व शंघाई काफी हद तक वायु प्रदूषण मुक्त हो चुके हैं।

लेकिन अपने देश में परिस्थितियां पूरी तरह विपरीत हैं। हवा, मिट्टी, पानी, जंगल के हालात न तो समाज को विचलित करते हैं, न ही सरकार को। और यही कारण है इस देश में पर्यावरण बड़ा मुद्दा नहीं बन सका, बल्कि ग्लोबल एयर रिपोर्ट को अमान्य बताकर कहा गया कि ऐसी रिपोर्ट में कोई दम नहीं है। जाहिर है, जब तक पर्यावरण एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बनेगा, तब तक राजनेता इसे प्राथमिकता नहीं देंगे। और जब तक यह चुनावी मुद्दा नहीं होगा, तब तक हम इसे राष्ट्रीय मुद्दा नहीं बना पाएंगे। पर्यावरण के राष्ट्रीय मुद्दा बनने पर संसद इससे मुंह नहीं फेर पाएगा। ऐसा पूरी दुनिया में हो रहा है। यही कारण है कि पर्यावरण संयुक्त राष्ट्र का एक बड़ा मृद्दा बन चुका है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस बार का पर्यावरण दिवस को वायु प्रदूषण से जोड़ा है। यह सही भी है, क्योंकि अभी हाल ही में ग्लोबल एयर रिपोर्ट ने विश्व में बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता जताई है। इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की 91 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में वायु प्रदूषण की चपेट में है।

इतना ही नहीं, हर दिन 800 लोग इसके प्रकोप से पीड़ित हैं। अकेले वर्ष 2017 में 30 लाख लोगों ने वायु प्रदूषण के कारण अपनी जान गंवाई, जिनमें भारत और चीन अग्रणी रहे। इसकी चपेट में बच्चे व बुजुर्ग ज्यादा आए हैं। अपने देश में गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा, पटना, लखनऊ, दिल्ली, जोधपुर, मुजफ्फरपुर, वाराणसी, मुरादाबाद व आगरा सबसे घातक शहरों में दर्ज हुए हैं।

अजीब बात है कि इसके बावजूद किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगती है। असल में पर्यावरण पर अर्थव्यवस्था भारी पड़ रही है। पश्चिम के विकास मॉडल की तर्ज पर हम वह सब कुछ करने पर उतारू हैं, जो पश्चिमी देशों ने विकास के नाम पर किया। लेकिन उन देशों की तरह पर्यावरण के प्रति सजगता और संवेदनशीलता हम नहीं सीख सके। हमें अपना विकास मॉडल चुनना होगा, ताकि हम पर्यावरण संरक्षण के प्रहरी भी बनें और प्रकृति के प्रहार से बच भी सकें।

Recommended

फैशन की दुनिया को नया आयाम देता ये खास फैशन शो
Invertis university

फैशन की दुनिया को नया आयाम देता ये खास फैशन शो

समस्या कैसी भी हो, हमारे ज्योतिषी से पूछें सवाल और पाएं जवाब मात्र 99 रुपये में
Astrology

समस्या कैसी भी हो, हमारे ज्योतिषी से पूछें सवाल और पाएं जवाब मात्र 99 रुपये में

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

बाढ़ और संवेदनहीनता : सच कड़वा है, लेकिन इस कड़वे सच को स्वीकार करना पड़ेगा

हमारे देश में सबसे बड़ी आपदा सरकारों की संवेदनहीनता की है। बिहार जैसे राज्यों में यह संवेदनहीनता बार-बार देखने को इसलिए मिलती है, क्योंकि वहां के लोग गरीबी के कारण इतने बेजुबान हैं कि अपने बच्चों का बेमौत मरना भी भुला देने पर मजबूर हैं।

23 जुलाई 2019

विज्ञापन

सिनेमा के सदाबहार सितारे अब दिखेंगे आपके मोबाइल पर, सुनाएंगे सिनेमा के रोचक किस्से

जया प्रदा, कामिनी कौशल, मौसमी चैटर्जी, जितेंद्र कपूर, प्रेम चोपड़ा, पूनम ढिल्लन, सुभाष घई, जावेद अख्तर और कई कलाकार यहां नजर आए। लिविंग लेजेंड्स नाम की वेब सीरीज में ये कलाकार जल्द ही आपको अपने मोबाइल पर बीते दिनों की यादें साझा करते भी दिखाई देंगे।

24 जुलाई 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree