विज्ञापन
विज्ञापन

अमेरिका साथ दिखा तो चीन पड़ा नरम, सहयोग कर सामूहिक समृद्धि की जताई इच्छा

प्रदीप कुमार Updated Wed, 24 Apr 2019 07:06 PM IST
बेल्ट ऐंड रोड फोरम (सांकेतिक तस्वीर)
बेल्ट ऐंड रोड फोरम (सांकेतिक तस्वीर)
ख़बर सुनें
विदेश सचिव विजय गोखले की चीन यात्रा और बेल्ट ऐंड रोड फोरम की बैठक से पहले चीन के विदेशमंत्री वांग यी ने महत्वपूर्ण संदेश दिया कि भारतीय प्रधानमंत्री के साथ वूहान जैसी एक और शिखर वार्ता की तैयारी की जा रही है। मौका था आज 25 अप्रैल से शुरू हो रहे बेल्ट ऐंड रोड फोरम (बीआरएफ) के विशाल सम्मलेन की ब्रीफिंग का। लेकिन उनकी प्रेस कांफ्रेंस का खासा हिस्सा भारत से संबंधित था। वांग ने कहा कि बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर चीन भारत की चिंताओं को समझता है। इसीलिए हमने कई बार कहा है कि यह आर्थिक पहल है और उसका निशाना कोई तीसरा देश नहीं है। हम तो बीआरआई के जरिये सहयोग कर सामूहिक समृद्धि हासिल करना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस ऐतिहासिक सड़क के तहत बन रहा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के उस भाग से निकल रहा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है। भारत इसे अपनी प्रभुसत्ता का उल्लंघन मानता है। वांग ने कहा, 'इतिहास से विरासत में मिले कश्मीर जैसे मुद्दों को, इस क्षेत्र में हमारे प्रयासों से दूर रखना चाहिए। इससे भारत की प्रभुसत्ता और भौगोलिक अखंडता संबंधी बुनियादी अवस्थिति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही भारत को विकास के अधिक अवसर मिलेंगे, जो आधुनिकीकरण के प्रयासों में सहायक होंगे। हमारा विश्वास है कि यह भारत के लिए अच्छा विकल्प है।'

अगले हजार साल तक के सामरिक चिंतन में लगा चीन जरूर समझता होगा कि भारत प्रभुसत्ता के मुद्दे को कभी नहीं छोड़ सकता। कोई स्पष्ट विभाजक रेखा न होने के बावजूद जवाहरलाल नेहरू मैकमोहन लाइन पर रत्ती भर भी समझौता करने का साहस नहीं जुटा पाए थे। संसद से लेकर सड़क तक ऐसी स्थितियां बन गई थीं कि कोरिया में अमेरिकी सेना के दांत खट्टे कर देने वाली चीनी सेना से भिड़ने के अलावा भारत की कमजोर सेना के सामने कोई विकल्प नहीं बचा था। कश्मीर विवाद में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से चीन-पाक गलियारा निकले और भारत इसे प्रभुसत्ता का विषय न माने, यह मुमकिन ही नहीं है। नई दिल्ली में कभी निहायत कमजोर सरकार बने, तो उसके लिए भी यह संभव न होगा। राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा बनाने वाली सरकार तो स्वप्न में भी नहीं सोच सकती।

जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर पर कुछ बदले रुख का संकेत देने के साथ ही बेल्ट ऐंड रोड पर भारत की शंकाएं दूर करने की कोशिश चीन के कूटनीतिक लचीलेपन की एक रेखा है। कल्पना करें कि मसूद अजहर पर चीन भारत के अनुकूल कोई फैसला कर लेता है। वह फैसला अंतर्राष्ट्रीय थू-थू से बचने के लिए होगा। उससे चीन, पाकिस्तान या भारत के बुनियादी सामरिक हितों पर असर नहीं पड़ेगा। आईएसआई फिर कोई नया मसूद अजहर खड़ा कर लेगी। पाक अधिकृत कश्मीर की जमीन पर बेल्ट ऐंड रोड भारत की कम, चीन की समस्या अधिक है। अधिकृत कश्मीर का कई हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पाकिस्तान ने पहले से चीन को दे रखा है। निर्णायक युद्ध के बगैर भारत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को मुक्त नहीं करा सकता। लेकिन भारत के सामरिक हितों को प्रभावित करने वाले कार्यों के लिए अगर गलियारे का इस्तेमाल होगा, तो बड़े स्तर पर बालाकोट की पुनरावृत्ति का विकल्प नई दिल्ली में किसी साहसी सरकार के सामने मौजूद रहेगा। चीन की अधिक गंभीर चिंता है भारत और अमेरिका के बीच बढ़ रहा सामरिक सहयोग।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों पार्टियों के सदस्यों ने भारत को नाटो के सहयोगी देश का दर्जा देने के लिए एक विधेयक पेश किया है। इस बिल के कानून बनने पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की पेशानी पर बल आने लगेंगे। इससे पहले भारत की उपग्रह मारक क्षमता के सफल परीक्षण का जब 'नासा' ने विरोध किया, तो अमेरिकी प्रशासन ने उसका प्रतिवाद करते हुए भारत का समर्थन किया। सशस्त्र सेनाओं संबंधी अमेरिकी सीनेट की बैठक में सामरिक कमान के चीफ जनरल जॉन हाइटन ने कहा,'भारत ने यह परीक्षण क्यों किया? सीधा जवाब यह है कि भारत अंतरिक्ष से अपने लिए खतरा महसूस कर रहा है। इसलिए भारत अंतरिक्ष में अपनी रक्षा करना चाहता है।' यह रेखांकित करने की जरूरत भारत को भी नहीं थी कि अंतरिक्ष में खतरा चीन से है।
 
भारत की सामरिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अमेरिका से सामरिक संबंध किस हद तक प्रगाढ़ किए जाएं? इसका उत्तर इस प्रश्न से निकलता है कि सुदूर भविष्य के लिए हमारा कोई राष्ट्र हित चिंतन है या नहीं। अगर है, तो अमेरिका के साथ रहना होगा। पाक-चीन गठजोड़ की कारगर काट वाया वाशिंगटन ही संभव हो सकती है। ठीक उसी तरह जैसे माओत्से तुंग ने बिरादराने सोवियत संघ को शिथिल करने के लिए अमेरिका का सामरिक सहयोगी बनने की हिम्मत जुटाई थी। दूरगामी हितों को सुरक्षित करने वाले देश हर संभावना से निपटने को तैयार रहते हैं। दक्षिण एशिया सामरिक परिदृश्य की अमेरिकी विद्वान सी. क्रिस्टीन फेयर अपनी नवीनतम किताब 'इन देयर ओन वर्ड्स:अंडरस्टैंडिंग लश्कर-ए-तैयबा' में लिखती हैं, 'भारत अपने दम पर पाकिस्तान को आतंकवाद छोड़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। वह क्षमता सिर्फ अमेरिका के पास है।....प्रमुख शहरों में भयानक क्षति और हताहतों की बड़ी संख्या के बावजूद भारत परमाणु हमले से बच निकलेगा। लेकिन भारत की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। बेहतर यह होगा कि अमेरिका उसकी घोषणा करे।'

तर्क की खातिर मान लें कि अमेरिकी थिंक टैंक और क्रिस्टीन फेयर जैसे विशेषज्ञ अमेरिकी पाश में भारत को बांधने के उद्देश्य से इस तरह के भयावह परिदृश्य उपस्थित करते हैं। मोमबत्ती लॉबी यही चाहेगी। तब यह भी सोचना होगा कि चीन और उसके प्रॉक्सी पाकिस्तान की दुरभिसंधियों को नाकाम करने का भारत के पास क्या रास्ता है।

Recommended

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए
Lovely Professional University

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए

क्या आपकी नौकरी की तलाश ख़त्म नहीं हो रही? प्रसिद्ध करियर विशेषज्ञ से पाएं समाधान।
Astrology

क्या आपकी नौकरी की तलाश ख़त्म नहीं हो रही? प्रसिद्ध करियर विशेषज्ञ से पाएं समाधान।

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

चौतरफा दबाव से घिरीं दीदी

तृणमूल कांग्रेस की जो तेजतर्रार नेता कभी चुनौतियों से टकराने में पीछे नहीं रहती थीं, आज ऐसा लगता है कि अपने विपक्षियों से मुकाबला करने को लेकर दुविधा में हैं

25 जून 2019

विज्ञापन

अधीर रंजन के 'नाली' पर पीएम ने याद दिलाया कांग्रेस का 'गटर' वाला बयान

लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अधीर रंजन के 'नाली' वाले बयान पर पीएम ने याद दिलाया कांग्रेस का 'गटर' वाला बयान।

25 जून 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
सबसे तेज अनुभव के लिए
अमर उजाला लाइट ऐप चुनें
Add to Home Screen
Election