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औरतों के खिलाफ अपराध की जड़

क्षमा शर्मा Updated Wed, 04 Dec 2019 08:10 AM IST
हैदराबाद में मुंह पर काली पट्टी बांध महिलाओं ने जताया विरोध
हैदराबाद में मुंह पर काली पट्टी बांध महिलाओं ने जताया विरोध - फोटो : एएनआई
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हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक युवती के साथ जिस तरह बलात्कार करके उसकी हत्या करके जला दिया गया, वह स्तब्ध करने वाली घटना है। अपराधियों की मंशा पर शक होने के बाद उसने यह बात अपनी बहन को फोन पर बताई भी, लेकिन बच नहीं सकी।
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दिल्ली में निर्भया बलात्कार एवं हत्या की घटना के बाद नए सख्त कानून बनने के बाद यह उम्मीद जताई गई थी कि इससे ऐसे अपराधों में कमी आएगी, पर ऐसा हुआ नहीं है। एक बार फिर पूरे देश में इस घटना को लेकर क्षोभ और गुस्सा है। अपराधियों को सरेआम फांसी पर लटकाने, उन्हें जिंदा जलाने, उनका केस न लड़ने, लड़कियों को तरह-तरह से जागरूक बनाने की बातें सोशल मीडिया पर की जा रही हंै। घर से बाहर निकलती लड़की जितनी सहज शिकार इन दिनों लगती है, पहले ऐसा नहीं था। आपसी मोहल्लेदारी में सब सबको जानते थे, और किसी मुसीबत के वक्त एक-दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ाते थे। भाइयों के दोस्त भी भाई से अधिक होते थे। यह कितना अफसोस है कि एक तरफ जिस मीडिया में औरतों के सशक्तीकरण की बात हो, वहीं वही मीडिया तरह-तरह के उत्पाद बेचने के लिए औरतों को सेक्स सिंबल बनाने और उसे दिखाने से परहेज नहीं करता है। औरतों की सारी आशा, आकांक्षाओं को कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे की आशा-आकांक्षाओं में बदल दिया जा रहा है। स्मार्टफोन पर उपलब्ध पोर्न, जिसे आज छोटे-छोटे बच्चे भी देखते नजर आते हैं, एक बीमार मानसिकता बनाते हैं। आज चाइल्ड पोर्न सबसे अधिक बिकने वाली चीज है। और जैसे ही इस पर रोक की बात होती है, तो अभिव्यक्ति की स्वत्रंता के वही ठेकेदार, जो औरतों के भी बड़े हितू बनते हैं, बैनर लेकर निकल पड़ते हैं कि हम क्या देखें या क्या न देखें, ये हमारा मामला है। जरा इसी तर्क को बलात्कार की घटनाओं से जोड़कर देखिए। एक लड़की को अगर आधुनिक तकनीक वस्तु के रूप में पेश कर रहा है, तो अपराधियों के हौसले तो बढ़ेंगे ही। पुलिस या कानून की विफलता के सिर पर ठीकरा फोड़ने से कुछ नहीं होने वाला।

औरत को तरह-तरह से सेक्स आब्जेक्ट बनाने से मीडिया को परहेज नहीं। लेकिन जैसे ही कोई ऐसी घटना होती है, वही गला फाड़कर चिल्लाता है और न्याय की मांग करता है। रेप की घटनाएं भी उसे एक तरह से सेक्सजनित अपराध बेचने की प्रेरणा देती हैं। इसीलिए आप देख सकते हैं कि ऐसी घटनाएं होते ही चारों तरफ हल्ला मच जाता है। ऐसा अपराध फिर न हो, इसमें किसी की दिलचस्पी नहीं होती।
महिलाओं के खिलाफ सिर्फ बलात्कार ही नहीं, कई अन्य तरह के अपराध होते हैं। पिछले एक हफ्ते में दिल्ली के आसपास और एनसीआर में एक चार साल की बच्ची को उसके सौतेले पिता ने छाती में घूंसा मारकर मार दिया। एक पिता ने अपनी दो बच्चियों का सिर कुचलकर हत्या कर दी। इन घटनाओं में लड़कियों ने अपने परिजनों के हाथों जान गंवाई। ये घटनाएं तो सिर्फ दिल्ली और उसके आसपास की हैं, पूरे देश में न जाने ऐसी कितनी घटनाएं हुई होंगी। लेकिन इन घटनाओं पर ऐसा गुस्सा नहीं देखा गया। निर्भया से लेकर इस डॉक्टर बिटिया के साथ हुए अपराध के बीच का जो समय है, उसमें लाखों औरतें तरह-तरह के अपराधों की शिकार हुई हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सिर्फ बलात्कार की घटनाओं को ही तरजीह दी गई है, बाकी की घटनाएं कहीं कोने में डाल दी गईं। जरूरत औरतों के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों के प्रति भी संवेदनशील नजरिया अपनाने की है और समाज में लैंगिक समानता व महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना जगाने की है।
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