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मजबूत सेना, कमजोर प्रधानमंत्री

मरिआना बाबर, पाकिस्तानी पत्रकार Updated Thu, 20 Jun 2019 06:25 PM IST
मजबूत सेना, कमजोर प्रधानमंत्री
मजबूत सेना, कमजोर प्रधानमंत्री - फोटो : a
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पाकिस्तान में सिर्फ तब ऐसा होता है, जब सड़कों पर आपाधापी नजर नहीं आती और सारे लोग टेलीविजन सेटों के पास जम जाते हैं। ऐसा तब होता है, जब पाकिस्तान और भारत के बीच कोई क्रिकेट मैच हो रहा हो। पटाखे पहले से तैयार रखे जाते हैं, ताकि पाकिस्तान के जीतने पर जश्न मनाया जा सके। पिछले हफ्ते भी पाकिस्तानी टीवी से चिपके हुए थे। पाकिस्तान में वैसे भी अक्सर यह कहा जाता है, दुनिया में सिर्फ एक मैच होता है और वह है भारत और पाकिस्तान का।
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लेकिन इंग्लैंड में विश्व कप के दौरान हुए मैच से दो अहम बातें निकली। पहली यह कि कप्तान विराट कोहली और टीम इंडिया हर मामले में लाजवाब थी। फिर यह फिटनेस की बात हो या एकाग्रता, बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग की, साफ दिख रहा था कि यह टीम विश्व कप के लिए खासी मेहनत कर रही है। दूसरी बात, आम पाकिस्तानियों ने खेल भावना का प्रदर्शन किया और खुलकर भारतीयों की तारीफ की। वास्तव में इंग्लैंड में मैच शुरू होने से पहले मोटरसाइकिल पर सवार ऐसे पाकिस्तानी युवाओं की तस्वीरें आई थीं, जिन्होंने ऐसी जर्सी पहन रखी थी जिनके पीछे 'विराट' लिखा हुआ था। पाकिस्तान के मैच हारने के बाद ट्वीटर पर गहरी हताशा तो देखी ही गई, इसके साथ ही हंसी-मजाक भी शेयर किए गए। एक पाकिस्तानी महिला ने इच्छा जताई कि काश विभाजन के दौरान रेडक्लिफ लाइन इस तरह खींची जाती कि विराट कोहली का घर पाकिस्तान के हिस्से में आ जाता! मेरे कई भारतीय दोस्तों ने मुझे बताया कि भारत में ऐसे पाकिस्तानी काफी सराहे जा रहे हैं, जो अपने खुद के खिलाड़ियों का मजाक बना रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, 'यदि भारत में ऐसा किया जाता तो फौरन ही हमें राष्ट्र विरोधी करार दिया जाता।'

नया आईएसआई प्रमुख

बहरहाल, पाकिस्तानी राजनीति की हकीकत की ओर लौटते हैं। इस बीच, एक बड़ी और अप्रत्याशित खबर पाकिस्तानी सेना से आई जहां खुफिया एजेंसी आईएसआई को नया चेहरा मिला। यह अप्रत्याशित इसलिए है, क्योंकि आईएसआई  के निर्वतमान प्रमुख लेफ्टिनेंट असीम मुनरो की नियुक्ति हाल ही में हुई थी और वह सिर्फ कुछ महीने ही इस पद पर बने रह सके। सामान्य तौर पर आईएसआई प्रमुख कई वर्षों तक पद पर बने रहते हैं और जनरल परवेज कयानी को तो आईएसआई प्रमुख के पद से पदोन्नत कर सेना प्रमुख बनाया गया था। जिस नए व्यक्ति की नियुक्ति की गई है, वह पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल (एन) के प्रमुख नवाज शरीफ के खिलाफ राजनीतिक रूप से सक्रिय थे। लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद आईएसआई के नए प्रमुख हैं और वह आईएसआई के आतंकवाद विरोधी खुफिया विंग के प्रमुख रह चुके हैं। जनरल फैज हमीद पहली बार उस वक्त सार्वजनिक रूप से चर्चा में आए थे, जब उन्होंने आतंकी संगठन टीटीपी (तहरीके पाकिस्तान तालिबान) के साथ शांति समझौता कराने में दखल दिया था, यह तब की बात है जब टीटीपी ने सड़क ब्लॉक कर रावलपिंडी और इस्लामाबाद के बीच महीनों तक संपर्क रोक दिया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट नवाज शरीफ को बर्खास्त कर चुका था और शाहिद खान अब्बासी बेहद कमजोर थे। उस समय टीवी कैमरों की पूरी चमक के बीच जनरल फैज हमीद सामने आए थे और उन्होंने टीएलपी (तहरीके लब्बैक पाकिस्तान) के मुल्लाओं के साथ विवादस्पद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

अमूमन पाकिस्तानी सेना में सबसे मजबूत शख्स होता है चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ और वह अपने वरिष्ठ कमांडरों के साथ जो नीतियां बनाता है, उसे ही बाकी लोग मानते हैं। यह दिलचस्प है कि चीफ ऑफ आर्मी स्टॉफ जनरल बाजवा संभवतः अक्तूबर 2019 में रिटायर होने वाले हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या वह जनरल परवेज कयानी की तरह सेवावृद्धि चाहेंगे। यदि वह सेवावृद्धि चाहेंगे तो बेहद कमजोर प्रधानमंत्री इमरान खान निश्चित रूप से ऐसा कर उपकृत होना चाहेंगे। लेकिन यह पाकिस्तानी सेना के लिहाज से ठीक नहीं होगा। जनरल परवेज कयानी को तीन वर्ष की सेवावृद्धि जरूर मिल गई थी, लेकिन सेना के भीतर उनके प्रति सम्मान घट गया था और लोग खुलेआम उनके खिलाफ बोलने लगे थे।

वास्तव में पाकिस्तान में सेना कभी इतनी मजबूत नहीं रही और प्रधानमंत्री कभी इतने कमजोर नहीं रहे। सारे देश में इमरान खान की आलोचना हो रही है, जिससे उनकी सरकार बेहद अलोकप्रिय हो गई है। वह सेना के समर्थन से प्रधानमंत्री बने हैं और उन्हें उसका समर्थन हासिल है। जो लोग वर्षों से उनके समर्थक थे और जिन्होंने उन्हें वोट दिया था, वे महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों के कारण उनके खिलाफ हो गए हैं। इतिहास में पाकिस्तान आर्थिक रूप से इतना कमजोर कभी नहीं रहा। एक डॉलर 157 पाकिस्तानी रुपये के बराबर हो गया है और यह पूरे क्षेत्र में सबसे खराब विनिमय दर है। अजीब बात यह है कि मंत्रिमंडल में और प्रधानमंत्री के आसपास ऐसे बहुत कम लोग हैं जिनका संबंध मूलतः पाकिस्तान तहरीके इंसाफ (पीटीआई) से था। इनमें से अधिकांश लोग भुट्टो की पीपीपी या नवाज शरीफ की पीएमल (एन) से आए हैं या फिर वे जनरल परवेज मुशर्रफ की सरकार में मंत्री रहे।

सेना के समर्थन से इमरान खान ने विपक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है, नतीजतन पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी जेल में हैं। वहीं सिविल मूवमेंट ऑफ पाकिस्तान तहाफुज मूवमेंट के भीतर भय व्याप्त है, जिसके दो सांसदों को हिरासत में लिया गया है और जिन्हें बजट सत्र के दौरान सदन में जाने नहीं दिया गया। पाकिस्तानी संसद के नियम के मुताबिक जेल में बंद सांसदों को सत्र चलने के दौरान सदन में लाया जाता है। लेकिन इमरान खान ने स्पीकर को निर्देश दिए हैं कि जेल में बंद किसी भी सदस्य को रिहा नहीं किया जाए। पीपीपी और पीएमएल (एन) के रूप में संयुक्त विपक्ष ने सरकार के लिए अपना पहला बजट पारित करवाना मुश्किल कर दिया है। यदि पीटीआई सरकार अपना पहला बजट पारित नहीं करवा पाती है, तो वह गिर जाएगी। ऐसे में इमरान खान का राजनीतिक अस्तित्व बचेगा, अभी कहना मुश्किल है।

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