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कर विवादों का समाधान

जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 12 Feb 2020 07:14 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी - फोटो : a
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विगत पांच फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान से संबंधित विवाद से विश्वास योजना लागू करने के लिए लोकसभा में प्रत्यक्ष कर विधेयक पेश किया। कहा गया है कि प्रत्यक्ष कर विवादों के मामलों में नवंबर, 2019 तक 9.32 लाख करोड़ रुपये का कर फंसा हुआ है। ऐसे में, प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना से अर्थव्यवस्था को जहां बड़ी धनराशि उपलब्ध होगी और मुकदमों पर होने वाला खर्च घटेगा, वहीं चूककर्ता करदाताओं के कर भुगतान संबंधी तनाव में कमी आएगी।
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वित्त मंत्री ने बजट में विभिन्न न्यायाधिकरणों में अटके 4,83,000 प्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान के लिए योजना की घोषणा की थी। इसके तहत करदाता अपनी पिछली अतिरिक्त आय का खुलासा कर सकेंगे। ऐसे विवादित मामलों में भुगतान 31 मार्च तक करने पर ब्याज और जुर्माने में पूरी छूट दी जाएगी। अब जब प्रत्यक्ष कर समाधान योजना को आकार दिया जाने लगा है, तब पूरा देश नई प्रत्यक्ष कर संहिता और नए आयकर कानून को आकार दिए जाने की प्रतीक्षा कर रहा है। रंजन समिति द्वारा प्रस्तुत नए आयकर कानून में छोटे करदाताओं की सहूलियत के लिए कई प्रावधान सुझाए गए हैं। असेसमेंट की प्रक्रिया सरल किए जाने के साथ-साथ आयकर कानून के किसी प्रावधान को लेकर करदाताओं द्वारा सीधे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से व्यवस्था लेने का प्रावधान है। कमाई पर दोहरे कर का बोझ खत्म करने की भी इसमें सिफारिश की गई है।

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद पटरी से उतरी देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अंग्रेजों ने वर्ष 1922 में राजस्व जुटाने के मद्देनजर आयकर को अस्थायी रूप से लागू किया था। तभी से यह सरकार की आय का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। यद्यपि आजादी के बाद प्रत्यक्ष कर नीति व आयकर कानून में कुछ सुधार किए गए। फिर 1961 में आयकर अधिनियम लागू किया गया। पर इसमें कार्यान्वयन संबंधी जटिलताएं रहीं, तो विभिन्न रियायतों व छूटों के कारण कर अनुपालन में मुश्किलें बढ़ती गईं।

यद्यपि केंद्रीय बजट में छोटे आयकरदाताओं, नौकरीपेशा और निम्न मध्यवर्ग के अधिकांश लोगों को लाभान्वित करने की कोशिश है, पर बड़ी संख्या में आयकरदाता इससे संतुष्ट नहीं हंै। नए बजट में आयकरदाताओं को दो विकल्प दिए हैं। हालांकि बड़ी संख्या में आयकरदाताओं का कहना है कि आयकर का नया पैटर्न करदाताओं के लिए सरल नहीं होगा। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि नए आयकर कानून से आयकर कानून की कमियां दूर की जा सकेंगी और जिन करदाताओं द्वारा अनुचित फायदा उठाया जाता है, उन्हें रोका जा सकेगा। देश की विकास दर के साथ-साथ शहरीकरण की ऊंची वृद्धि दर के कारण देश में मध्यवर्ग की संख्या तेजी से बढ़ी है। पर इनमें से बड़ी संख्या में लोग आयकर नहीं चुकाते। दूसरे विकासशील देशों की तुलना में भारत में अब भी छिपे हुए आयकरदाताओं की संख्या बहुत अधिक है।

निस्संदेह वित्त मंत्री ने पिछले साल के अपने पहले बजट में अप्रत्यक्ष कर विवादों के समाधान हेतु जिस सबका विश्वास योजना को लागू किया था, उसकी बदौलत अप्रत्यक्ष करों से संबंधित करीब 1,89,000 विवादित मामलों का निपटान किया गया है और इससे करीब 35 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिला है। विवाद से विश्वास योजना से जहां चूककर्ता आयकरदाता लाभान्वित होंगे, वहीं इस योजना से जो बड़ी धनराशि उपलब्ध होगी, वह सुस्ती के दौर से बाहर निकलती अर्थव्यवस्था के लिए लाभप्रद होगी।
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