विज्ञापन
विज्ञापन

आर्थिक मुश्किलों में पाकिस्तान, आईएमएफ की शरण में जाने के लिए मजबूर

कुलदीप तलवार Updated Tue, 28 May 2019 05:35 AM IST
Imran Khan
Imran Khan
ख़बर सुनें
पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार को कायम हुए नौ महीने हो गए हैं, पर अभी तक उन्हें बहुत से बुनियादी मामले समझ में नहीं आ सके। सत्ता संभालते ही उन्होंने वादा किया था कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास मदद मांगने किसी भी सूरत में नहीं जाएंगे। पर पाकिस्तान के आर्थिक हालात इतने बदतर हो गए कि उन्हें आईएमएफ की शरण में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को कड़े मापदंडों के साथ छह अरब डाॅलर का बेलआउट पैकेज तो मिल गया है, पर इसके बाद भी उसकी आर्थिक हालत बदलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही। आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान इस मदद से चीन व अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं का भारी कर्ज उतारेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार को अपने पहले साल में 19 अरब का कर्ज चुकाना है। पर ऐसा नहीं हो सका। उसके विदेशी मुद्रा कोष का भंडार सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। दरअसल आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच पैकेज के मसौदे पर दस्तखत करने से पहले ही टैक्स छूट के खात्मे और गैस व बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी पर सहमति बन गई थी, जिससे लोगों पर 340 अरब रुपये का बोझ पड़ेगा।

परिसंपत्तियों का निजीकरण होगा और पिछले दरवाजे से अवमूल्यन करना पड़ेगा, जिससे और भी सख्त कदम उठाने होंगे। इससे आम पाकिस्तानी का जीना मुश्किल हो जाएगा। पैकेज के तहत पाकिस्तान को कर्ज तीन साल के दौरान मिलेगा। इससे आर्थिक संकट से जूझ रहे पाक के आधारभूत ढांचे और कर्ज की देनदारी में सुधार की उम्मीदों को लेकर चिंताएं और बढ़ेंगी। पाक मीडिया में इसकी आलोचना शुरू हो गई है। अखबार लिख रहे हैं कि आईएमएफ के पैकेज ने लाखों लोगों पर जो आर्थिक बोझ डाला है, उसके नतीजे जल्दी सामने आएंगे। आईएमएफ डील होने के कारण ही अर्थव्यवस्था डगमगाती दिख रही है। रुपया डॉलर के मुकाबले 148-150 रुपये तक पहुंच गया है। महंगाई आसमान छू रही है। इमरान खान ने लोगों को सब्र से काम लेने के लिए कहा है।

आगामी 18 जून को वहां बजट पेश होना है। चूंकि आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने बेहद मुश्किल शर्त रखी है, इसलिए यह बजट पाक अधिकारियों की वित्तीय रणनीति की पहली अग्निपरीक्षा होगा। इस बजट में राजस्व में बढ़ोतरी, टैक्स में दी जा रही छूट में कटौती जैसे कदमों से प्राथमिक घाटा जीडीपी का 0.6 प्रतिशत करने का लक्ष्य पूरा करना होगा। इसके साथ ही पाकिस्तान को अपने खर्च पर भी लगाम लगानी होगी। आम ख्याल यह है कि इमरान खान की सरकार अगर इन शर्तों पर अमल करेगी, तो उसे जनता के भारी रोष का सामना करना पड़ेगा।

बड़े पैमाने पर उखाड़-पछाड़ के मामलों ने और उलझा दिया है। वित्त मंत्री, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर और संघीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष को हटा दिए जाने से इन संस्थाओं का भरोसा कमजोर हुआ है। उससे पहले इमरान खान ने अपने मंत्रिमंडल में रद्दोबदल की थी। किसी से एक विभाग नहीं चल सका, तो उसे दूसरा विभाग दे दिया गया। इससे भी कामकाज में कोई सुधार नहीं आया है। इससे जनता का इमरान खान से मोहभंग होता जा रहा है।

पाकिस्तान में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जिनका मानना है कि मुल्क परोक्ष रूप से राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है। वहां मध्यावधि चुनाव की भी चर्चा जारी है। इमरान खान को अगर अपनी सरकार को नाकामी से बचाना है, तो जरूरी है कि वह तुरंत जनता को आर्थिक राहत देने का बंदोबस्त करें। इसके बगैर वह मुल्क की डूबती नैया को नहीं बचा पाएंगे।

Recommended

'अभिरुचि' एक नई पहल जो बना रही है छात्रों का भविष्य
Invertis university

'अभिरुचि' एक नई पहल जो बना रही है छात्रों का भविष्य

लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए इस सावन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक - 22/ जुलाई/2019
Astrology

लंबी आयु और अच्छी सेहत के लिए इस सावन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक - 22/ जुलाई/2019

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

बुंदेलखंड के विकास की रूपरेखा: विकास बोर्ड के सुझावों पर अमल हो तो बदलेगी तस्वीर

अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि के बावजूद बुंदेलखंड का जैसा विकास होना चाहिए था, वैसा नहीं हो सका है। बुंदेलखंड विकास बोर्ड के गठन के रूप में राज्य सरकार की पहल से इस जड़ता को तोड़ने में मदद मिलेगी।

18 जुलाई 2019

विज्ञापन

मुकेश अंबानी ने बीते 11 साल में कभी नहीं बढ़ाई अपनी सैलरी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी की सैलरी से ज्यादा कंपनी में उनके रिश्तेदारों की सैलरी है। मुकेश अंबानी ने लगातार 11वें साल भी अपनी सैलरी में इजाफा नहीं किया है।

20 जुलाई 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree