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संप्रभुता से कोई समझौता नहीं : अचानक अमरनाथ यात्रा बीच में रोक दी गई

मनीषा प्रियम, राजनीतिक विश्लेषक Updated Tue, 06 Aug 2019 12:45 AM IST
अमरनाथ यात्रा
अमरनाथ यात्रा - फोटो : PTI
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सियासी गलियारों से लेकर देश के जनमानस तक रविवार से ये अटकलें थीं कि कुछ बड़ा होने वाला है। कुछ दिन पहले ही अचानक अमरनाथ यात्रा बीच में रोक दी गई। उसके पहले और बाद में अप्रत्याशित संख्या में सैन्य टुकड़ियां जम्मू-कश्मीर में भेजी गईं। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती व उमर अब्दुला समेत कई नेताओं के राजनीतिक बयान देने की स्वतंत्रता पर बंदिशें लगा दी गईं, साथ ही राज्य के कई जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई। कयास लगाए जा रहे थे कि, शायद संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया जाएगा। अंततः सोमवार सुबह होते ही सारी बातें स्पष्ट हो गई।
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सोमवार को मोदी सरकार की केंद्रीय कैबिनेट की एक आकस्मिक बैठक हुई। और इसके तुरंत बाद देश के गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा के पटल पर राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना को रखते हुए अनुच्छेद 370 के खत्म किए जाने की बात कही। गौरतलब है कि संविधान ने अनुच्छेद 370 में जम्मू कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा दिया था। जम्मू-कश्मीर के मामलों और कानूनों पर विशेष नजर रखने वाले कानूनविद् एजी नूरानी का मानना है कि, देश में केंद्र और राज्यों के रिश्तों में अनुच्छेद 370 अनूठा और जटिल रहा है। 

वर्ष 1950 के मध्य से देश के लिए बनने वाले नियम-कानून यदि लागू भी होते थे तो पहले उन्हें जम्मू-कश्मीर में वहां की विधानसभा में पारित कराना होता था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद जिस अधिसूचना को को राज्यसभा में पेश किया गया है, उससे अनुच्छेद 370 की कानूनी वैधता समाप्त हो गई है। इस बात का वादा भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में किया था, जो पूरा होता दिख रहा है।
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