विज्ञापन
विज्ञापन

तय हो न्यूनतम वोटिंग का सिद्धांत

अजय सेतिया Updated Sun, 12 May 2019 07:50 AM IST
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
देश की दो लोकसभा सीटों श्रीनगर और अनंतनाग के पिछले चार लोकसभा चुनावों की समीक्षा करें, तो पाएंगे कि वहां 28 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग कभी नहीं हुई। अनंतनाग सीट पर वर्ष 2004 से वर्ष 2019 तक क्रमश 15.04 , 27.10 , 28.84 और अब 2019 में मात्र 8.76  प्रतिशत वोटिंग हुई है। ठीक इसी तरह श्रीनगर में वर्ष 2004 में 18.53, 2009 में 25.55 , 2014 में 25.86 , 2017 के उपचुनाव में 7.12 प्रतिशत और अब 2019 के चुनाव में 14.27 प्रतिशत वोटिंग हुई है। पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद और फारूक अब्दुल्ला और अब महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला अटल बिहारी वाजपेयी की कश्मीर नीति की तारीफ करते रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी से जब एक बार पूछा गया था कि क्या कश्मीर समस्या का हल संविधान के दायरे में ही होगा, तब उन्होंने कहा था, 'कश्मीर समस्या का हल इंसानियत के दायरे में होगा।’ यही बात अलगाववादियों को चुभ गई और उपरोक्त दोनों लोकसभा सीटों पर वर्ष 2004 में वोटिंग प्रतिशत गिर गया। जबकि उसके बाद मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में जब आतंकवाद फिर से उभार पर था, तो वर्ष 2009 और 2014 में वोट प्रतिशत बढ़ गया। ऐसे ही नरेंद्र मोदी के पांच साल के प्रधानमंत्री काल के अंतिम छह महीनों में जब आतंकवाद को सख्ती से कुचलने की कार्रवाई शुरू हुई है, तब वहां वोट प्रतिशत फिर धड़ाम से गिर गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
कश्मीर में आतंकवाद उस समय शुरू हुआ, जब मुफ्ती मोहम्मद सईद देश के गृह मंत्री थे। उन्हीं के कार्यकाल में सबसे ज्यादा आतंकवादियों को रिहा भी किया गया। इसके बावजूद भाजपा ने मुफ्ती मोहम्मद सईद को मुख्यमंत्री बनाकर क्या गलती नहीं की थी? इस बार जिस तरह वोट प्रतिशत में रिकॉर्ड गिरावट आई है, क्या उससे यह नहीं पता चलता कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी (पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) के साथ मिलकर सरकार बनाने का नरेंद्र मोदी का फैसला गलत था, जिसकी सजा जम्मू-कश्मीर के मुसलमान और हिंदू दोनों भाजपा और पीडीपी को देंगे? मुफ्ती मोहम्मद सईद के देहांत के बाद भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती खुद अनंतनाग से खड़ी हुईं। अलगाववादियों के वोट हासिल करने के लिए महबूबा मुफ्ती ने भारत से अलग होने का नारा तक बुलंद किया। इसके बावजूद वह अनंतनाग में वोटिंग का प्रतिशत बढ़ाने में सक्षम नहीं हो पाईं। महबूबा मुफ्ती अनंतनाग सीट जीत जाएं, तो भी न तो पीडीपी वर्ष 2014 की तरह तीन सीटें जीत पाएगी, न ही भाजपा को तीन सीटें मिलेंगी।

जम्मू-कश्मीर के चुनाव में इस बार नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी में एक दूसरे से बड़ा अलगाववादी साबित करने की होड़ मची थी। इसके बावजूद अनंतनाग सीट पर सिफ 8.76 प्रतिशत और श्रीनगर में, जहां नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला खुद चुनाव लड़ रहे थे, 14.27 प्रतिशत वोटिंग हुई। इतनी कम वोटिंग यही साबित करती है कि श्रीनगर और अनंतनाग की जनता ने फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को खारिज कर दिया है।

इससे दो महत्वपूर्ण सवाल पैदा होते हैं। पहला तो यह कि क्या चुनाव के दौरान अलगाववाद का नारा बुलंद करने पर उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं होना चाहिए? ऐसा न कर हम टुकड़े-टुकड़े गैंग को ही बढ़ावा देते रहेंगे। दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह पैदा होता है कि चुनाव के लिए क्या न्यूनतम वोटिंग का कोई सिद्धांत लागू नहीं किया जाना चाहिए? अब महबूबा मुफ्ती को 50 प्रतिशत वोट मिल जाएं, तब भी वह केवल दो प्रतिशत वोटरों का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा सदस्य बन जाएंगी। इस विसंगति को दूर करने के लिए जरूरी है कि न्यूनतम वोटिंग का सिद्धांत तय किया जाए, भले ही वह 50 प्रतिशत तय हो, और वह अलगाववाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर का निर्वाचन क्षेत्र हो या देश का कोई अन्य निर्वाचन क्षेत्र। गुजरात सरकार ने स्थानीय चुनावों में अनिवार्य वोटिंग का सिद्धांत तय किया था, जिसे उसे वापस लेना पड़ा था। पर अब वक्त आ गया है कि वोटिंग न करने वाले को सरकारी सुविधाओं के लाभ से वंचित किया जाना चाहिए और किसी के चुने जाने की न्यूनतम शर्त 50 प्रतिशत वोटिंग होनी चाहिए। इससे चुनावों में वोटिंग बढ़ाने के लिए उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।

Recommended

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए
Lovely Professional University

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए

बात करें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से और पाइये अपनी समस्या का समाधान |
Astrology

बात करें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से और पाइये अपनी समस्या का समाधान |

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

सच्चाई से दूर भागती कांग्रेस

यदि वह राहुल को पद पर बने रहने को विवश करती है, तो इसे सिर्फ नौटंकी की तरह देखा जाएगा। इस संकट से उबरने में नाकाम रहने पर कांग्रेस के प्रति देश में निराशा का भाव ही बढ़ेगा।

12 जून 2019

विज्ञापन

मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सफर कराने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार और मेट्रो मैन ई श्रीधरन आमने-सामने

मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सफर कराने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार की योजना को ई श्रीधरन ने झटका दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी भी लिखी है। इस चिट्ठी के जवाब में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपना पक्ष रखा है।

15 जून 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
सबसे तेज अनुभव के लिए
अमर उजाला लाइट ऐप चुनें
Add to Home Screen
Election