कथा / लघुकथाः जब सपने में आए लंबे लोग

Varun Kumar Updated Mon, 13 Aug 2012 03:17 PM IST
Little Boy Tall Men Dream
बात बहुत पुरानी नहीं है। कुछ सालों पहले जैक नाम का एक छोटा बच्चा था। जैक के मां-पापा उसे बहुत प्यार करते थे, वो पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था, लेकिन फिर भी उदास रहता था। उदासी की वजह थी कि उसका कद बहुत छोटा था। उसके सारे दोस्त उससे लंबे थे। सब उसे छोटू कहकर चिढ़ाते भी थे। जैक को ये सब बहुत बुरा लगता। वो रात में चांद को देखकर एक विश मांगता,‘प्लीज मुझे लंबा कर दो’। मगर फिर वो ये भी सोचता कि शायद कोई उसकी विश पूरी नहीं कर सकता।
ऐसे ही कई दिन गुजर गए। जैक बहुत ज्यादा उदास रहने लगा। एक रात को वो अपनी विश मांगकर सो गया। उस रात तारों ने उसकी बात सुन ली थी। अचानक जैक के कमरे में तेज रोशनी हुई और जैक एक दूसरी दुनिया में पहुंच गया। एक ऐसी दुनिया जहां सब लोग लंबे थे। इतने सारे लंबे लोगों के बीच में सिर्फ जैक ही था जो छोटा था। मगर अब कोई उस पर हंसने वाला नहीं था। बल्कि इन लंबे लोगों और उनके बड़े-बड़े कान, लंबी-लंबी टांगों को देखकर किसी को भी हंसी आ सकती थी।

जैक ने वहां रहकर देखा कि इन लंबे लोगों को कोई भी काम करने में बहुत तकलीफ होती है। ये लोग तो किसी से बात भी नहीं कर पाते, क्योंकि थोड़ा सा झुकने पर इनकी टांगे मुड़ने या टूटने का डर रहता था। इन लंबे लोगों के बहुत सारे काम जैक को करने पड़ते। खाना बनाना हो तो स्टोव ऑन करना, टीवी ऑन करना, कार का गियर लगाना यहां तक कि नहाने के लिए टैप भी जैक को ही चलानी पड़ती थी। सब लोग जैक को आवाज लगाते। हर तरफ अपनी जरूरत को देखकर जैक बड़ा खुश होता। उसे लगता कि यहां किसी का काम उसके बिना हो ही नहीं सकता। लेकिन इस खुशी के बाद भी जैक इतना सारा काम करके बहुत थक जाता था।

यहां कोई भी उसकी तरह नहीं था, जिसके साथ वो खेल सके। हालांकि लंबे लोग उसे बहुत प्यार करते थे, लेकिन फिर भी जैक को बहुत अकेला लगता था। एक दिन जैक ने सोचा कि क्यों न वो भी देखे कि इतना लंबा होकर कैसा लगता है। उसने एक लंबे लड़के से कहा कि वो उसे अपने सिर पर बिठाए। लड़के ने जैक को अपने बड़े-बड़े हाथों की हथेलियों से उठाकर सिर पर बिठा दिया। पर लड़के के चिकने बालों पर बैठने में जैक को काफी परेशानी हो रही थी।

जब भी लड़का थोड़ा सा टेढ़ा-मेढ़ा चलता जैक फिसलने लगता। अचानक ऐसे ही जैक का बैलेंस खराब हुआ और वो सिर से फिसल कर सीधा नीचे गिर पड़ा। बहुत तेज रोने और चिल्लाने के बाद भी लंबे-लंबे लोगों के पैरों की आवाज में किसी को उसकी आवाज सुनाई नहीं दी। जैक इतनी तेज गिरा था कि दर्द को महसूस करके जैक की आंख खुल गई। उसने देखा कि वो अपने कमरे में है। उसे अब भी तारों की झिलमिल रोशनी जैसा महसूस हो रहा था, लेकिन ये सूरज की रोशनी थी जो खिड़की से अंदर आ रही थी। इतने गहरे सपने के बाद जैक के लिए यकीन करना मुश्किल था कि सब कुछ वैसा ही है।

उसने अपने हाथ-पैरों को छूकर देखा सब कुछ पहले जैसा ही था। उसने देखा बाहर सुबह हो चुकी है, खुद को गुड मार्निंग कहकर जैक बिस्तर से उठा और खिड़की से बाहर देखा। सब लोग वैसे ही थे, जैसे पहले थे। कोई इतना लंबा नहीं था कि उसे अपने काम करने में ही दिक्कत हो। अब जैक को अपने छोटे कद से भी कोई दिक्कत नहीं थी, वो खुश था। तारों ने उसकी विश पूरी कर दी थी।

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