विज्ञापन
विज्ञापन

बंगाली क्षेत्रीयता से जा मिला केसरिया

सुबीर भौमिक Updated Thu, 23 May 2019 08:42 PM IST
भाजपा कार्यकर्ता
भाजपा कार्यकर्ता - फोटो : a
ख़बर सुनें
इस लोकसभा चुनाव का मूल पाठ अगर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सत्ता में वापसी से जुड़ा था, तो पश्चिम बंगाल का चुनावी नतीजा उसी का उप-पाठ है। जैसे केंद्र की सत्ता में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की धमाकेदार वापसी हुई है, वैसे ही पश्चिम बंगाल में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है और वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की सीटों के नजदीक पहुंच गई है। साफ है कि वाम दलों का वोट बैंक भाजपा में जा मिला है। यह लेफ्ट के लिए बड़ा झटका है। नरेंद्र मोदी ने तृणमूल प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 'स्पीड ब्रेकर दीदी' बताया था। वह सच कह रहे थे। ममता बनर्जी ने बंगाल में भाजपा को निर्णायक जीत हासिल करने से रोक दिया है, पर केसरिया पार्टी तृणमूल के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बंगाल में यह केसरिया लहर तीन कारणों से महत्वपूर्ण है-
वैसे तो बंगाल 1947 में धार्मिक आधार पर विभाजित हुआ था, पर यहां हिंदुत्ववादी पार्टी कभी मजबूत नहीं हुई। कांग्रेस, वाम मोर्चा और तृणमूल- इन तीनों का ही धर्मनिरपेक्ष स्वरूप रहा है। पर इस चुनाव में तृणमूल को भारी चुनौती देकर भाजपा ने बंगाल में आजादी से बाद की राजनीतिक परंपरा को ही पूरी तरह बदल दिया है। अगर भाजपा बंगाल में अपने इस जनाधार को बरकरार रखती है, तो इससे साबित हो जाएगा कि हिंदुत्व की राजनीति यहां के लिए बाहरी या त्याज्य विचारधारा नहीं है,  बल्कि यह बंगाल की मुख्यधारा का अंग बन जाएगी।

वर्ष 1977 से पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय पार्टी को कभी ऐसी चुनौती नहीं मिली, जैसी इस बार भाजपा ने तृणमूल को दी है। पिछले चालीस साल से बंगाल ने अपना विशिष्ट राजनीतिक तरीका अख्तियार कर रखा था। इसके तहत पहले वाम दलों ने कांग्रेस और भाजपा को चुनौती दी, फिर तृणमूल ने भाजपा के खिलाफ असामान्य आक्रामकता का परिचय दिया। वरिष्ठ पत्रकार चंदन मित्र कहते हैं कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा तृणमूल को मात देकर सत्ता में आ सकती है। इसका मतलब यह है कि बंगाल अपनी विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय विमर्श में बदल देगा। यदि अब कोई हिंसा भड़कती है, तो राष्ट्रपति शासन का विकल्प खुला रहेगा। नरेंद्र मोदी तक कह चुके हैं कि कानून-व्यवस्था के मामले में बंगाल का हाल जम्मू-कश्मीर से भी बुरा है। रूपा गांगुली कह ही चुकी हैं कि तृणमूल की हिंसा पर अगर अंकुश लगाया जाता, तो भाजपा 30 सीटें जीत सकती थी। जिस तरह से धार्मिक ध्रुवीकरण हुआ, बांग्लादेशी घुसपैठियों से लेकर एनआरसी का मामला उठा और तुष्टीकरण पर खाई बढ़ी, उससे न केवल हिंदू-मुस्लिम के बीच, बल्कि धर्मनिरपेक्ष रुझान वाले हिंदू और हिंदुत्ववादी कोच राजबंशी, गोरखालैंड की मांग करते नेपाली, संथाल और मुंडा आदिवासी समूह तथा हिंदी भाषियों के बीच भी खाई बढ़ेगी। ऐसे ही भाजपा की आक्रामकता तथा एनआरसी का डर बांग्लादेश को चीन के नजदीक ले जाएगा।

Recommended

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए
Lovely Professional University

एलपीयू ही बेस्ट च्वॉइस क्यों है इंजीनियरिंग और अन्य कोर्सों के लिए

बात करें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से और पाइये अपनी समस्या का समाधान |
Astrology

बात करें इंडिया के बेस्ट एस्ट्रोलॉजर्स से और पाइये अपनी समस्या का समाधान |

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

सच्चाई से दूर भागती कांग्रेस

यदि वह राहुल को पद पर बने रहने को विवश करती है, तो इसे सिर्फ नौटंकी की तरह देखा जाएगा। इस संकट से उबरने में नाकाम रहने पर कांग्रेस के प्रति देश में निराशा का भाव ही बढ़ेगा।

12 जून 2019

विज्ञापन

बाबा नीब करौरी की जयकारों से गूंज उठा कैंची धाम, आशीर्वाद के लिए घंटों लाइन में लगे रहे श्रद्धालु

बाबा नीब करौरी महाराज के प्रति श्रद्धा, विश्वास के साथ डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु विश्व प्रसिद्ध कैंचीधाम पहुंचे। देखिए शनिवार को नैनीताल में कैंची धाम मंदिर में भक्तों की आस्था कैसे उमड़ी।

16 जून 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
सबसे तेज अनुभव के लिए
अमर उजाला लाइट ऐप चुनें
Add to Home Screen
Election