विज्ञापन
विज्ञापन

भारत-अमेरिकी रिश्ते की जुगलबंदी

सुरेंद्र कुमार Updated Sun, 23 Jun 2019 07:00 PM IST
मोदी-ट्रंप
मोदी-ट्रंप - फोटो : a
ख़बर सुनें
किसी भी डांस फ्लोर पर सुंदर प्रदर्शन के लिए दोनों भागीदारों को एक-दूसरे को खींचना या धक्का नहीं देना चाहिए, बल्कि एक-दूसरे का पूरक बनना चाहिए और एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए एक दूसरे की श्रेष्ठतम क्षमता को बाहर लाने में मदद करनी चाहिए। क्या यह राष्ट्रों के बीच संबंधों के लिए भी सही नहीं है? एक दूसरे को 'स्वाभाविक सहयोगी' और 'रणनीतिक भागीदार' कहना ही पर्याप्त नहीं है, भागीदारों को शब्दों और भावनाओं में इस विचार के साथ जीना चाहिए। समय-समय पर राष्ट्रों के संबंधों में कुछ तनाव देखे जा सकते हैं, इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए और इन्हें खत्म करना चाहिए। उनमें सभी मुद्दों पर स्पष्ट, शांतिपूर्ण ढंग से और निष्पक्ष रूप से चर्चा करने की परिपक्वता होनी चाहिए, ताकि स्वीकृत समाधान तक पहुंचा जा सके।
विज्ञापन
एक सप्ताह पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था, मोदी है, तो मुमकिन है। भारत-अमेरिकी संबंधों के संदर्भ में उन्होंने कहा था कि मोदी के साथ द्विपक्षीय रिश्तों में प्रगति संभव है। काश, हम भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में ऐसा ही कह पाते! वह मोदी को सार्वजनिक रूप से प्रिय मित्र कह सकते हैं, और उन्हें पसंद करने का दावा कर सकते हैं, पर साथ ही हर्ले डेविडसन मोटरसाइकिल पर मात्र 50 फीसदी आयात शुल्क कम करने पर मोदी का मजाक उड़ा सकते हैं और भारत को टैरिफ किंग कहकर बदनाम भी कर सकते हैं। हां, यह सच है कि कई अमेरिकी उत्पादों पर भारत के आयात शुल्क अधिक हैं, लेकिन ट्रंप ने जिस तरीके से इस मुद्दे को उठाया, वह सही नहीं है! खुद को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ सौदेबाज मानने वाले ट्रंप को इस बात का एहसास होना चाहिए, जो मोदी हमेशा कहते हैं कि सबसे अच्छा सौदा वह होता है, जिसमें दोनों ही पक्ष विजेता होने का दावा कर सकें!

भारत-अमेरिकी संबंधों की समस्याओं का समाधान असंभव नहीं है, लेकिन इन्हें व्यावसायिक लेन-देन के संकीर्ण चश्मे से देखने के बजाय व्यापक रणनीतिक दृष्टि और समग्र द्विपक्षीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए परिपक्वता और संवेदनशीलता के साथ निपटाना चाहिए। मामूली समस्याओं के रचनात्मक समाधान से न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक असर पर पड़ेगा। वह कितना अच्छा दिन होगा, जब भारत और अमेरिका के लोग कह सकेंगे, ट्रंप और मोदी हैं, तो सब कुछ मुमकिन है!

सार्वजनिक धारणा के विपरीत बहुस्तरीय और बहुआयामी भारत-अमेरिकी संबंध कभी बहुत अच्छे नहीं रहे, लेकिन अब इसका कायाकल्प हो गया है। वर्ष 2018 में वस्तु एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 141 अरब डॉलर को पार कर गया। पिछले सात वर्षों में भारत में अमेरिका का रक्षा निर्यात काफी बढ़ा है। 300 से ज्यादा संयुक्त सैन्याभ्यास हुए हैं, तो अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर मानसून की भविष्यवाणी तक और कृषि से लेकर शिक्षा तक हर प्रासंगिक क्षेत्र को कवर करने वाले 50 से ज्यादा द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों के दृष्टिकोण में तालमेल है, दोनों के बीच 2+ 2 रणनीतिक एवं व्यावसायिक वार्ता हुई है, अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच बातचीत होती रहती है। ट्रंप अक्सर कहते हैं कि हर्ले डेविडसन पर आयात शुल्क को कम क्यों नहीं किया जाता। अमेरिकी बादाम और अखरोट का स्वाद लेने वाले भारतीयों की संख्या हर्ले का उपयोग करने वालों की तुलना में बहुत ज्यादा है। मोटरसाइकिल पर चलने वाले लाखों भारतीय हर्ले नहीं खरीदते। इसलिए हर्ले भारतीय बाजारों में नहीं छा सकता। हमें कृषि क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों के उत्पादों पर शुल्क घटाना चाहिए। किसानों का संकट भारत की वास्तविक समस्या है। एक देश जो महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखता है, उसे विदेशी प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध अपने उद्योग का अत्यधिक संरक्षण नहीं करना चाहिए। भारत में दूरसंचार और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विदेशी प्रतिस्पर्धा ने जो चमत्कार किए हैं, वह एक स्पष्ट सबक होना चाहिए। आय में भारी असमानता को देखते हुए, भारत में स्टेंट, घुटने का कवर और आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई जेनेरिक दवाओं जैसी मेडिकेयर वस्तुओं की कीमतों पर से नियंत्रण हटाया नहीं जा सकता, क्योंकि इससे इनके दाम बढ़ जाएंगे।

तरजीही राष्ट्रों की श्रेणी वाली सुविधाओं (जीएसपी) की फिर से बहाली के लिए हमें अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाना नहीं चाहिए,  क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था आज वह नहीं है, जो 1975 में थी। इसके बजाय हमें उन चीनी उत्पादों की आपूर्ति की संभावनाएं तलाशनी चाहिए, जो 25 फीसदी अमेरिकी शुल्क के कारण महंगे हो गए हैं। अकेले वालमार्ट हर वर्ष 15 अरब डॉलर की चीनी वस्तुओं का आयात करता है। कुछ अमेरिकी कंपनियां चीन से अपने विनिर्माण संयंत्रों को बाहर ले जाना चाहती हैं, अगर हम उन्हें व्यवसाय अनुकूल माहौल प्रदान करने में सक्षम होते हैं, तो वे भारत में अपने संयंत्र लगा सकती हैं।

दोनों देश अतीत के संकोच से बाहर निकल आए हैं। भारत और अमेरिका ने विभिन्न अवसरों पर एक-दूसरे की मदद की है और भागीदारी बढ़ाई है, जो दोनों देशों के नेतृत्व के आपसी विश्वास और भरोसे को दर्शाता है। जिम्मेदार साझेदार के रूप में उन्हें एक दूसरे की सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान का तेल महत्वपूर्ण है। भारत और ईरान के बीच अन्य मामलों में भी गहरे संबंध हैं। रूस का एस-400 विमान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। भारत को एक विकसित देश में बदलने के मोदी के दृष्टिकोण की सफलता के लिए अमेरिका के साथ निकट संबंध आवश्यक है। इससे भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को भी बल मिल सकता है। लेकिन क्या भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता खो देनी चाहिए और रक्षा जरूरतों के लिए अपनी अन्य जरूरतों को भुला देना चाहिए? ऐसा करना बुद्धिमानी नहीं होगा।

अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक वर्चस्व के छद्म युद्ध में भारत को चुप बैठना चाहिए, ताकि दोनों उसे अपने पाले में खींचें। भारत ट्रंप के अपारंपरिक तरीके से कैसे तालमेल बिठाता है, यह हमारे नवनियुक्त विदेश मंत्री की परीक्षा होगी।

-लेखकइंडो-अमेरिकन फ्रेंडशिप एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष हैं।
विज्ञापन

Recommended

OPPO के Big Diwali Big Offers से होगी आपकी दिवाली खूबसूरत और रौशन
Oppo Reno2

OPPO के Big Diwali Big Offers से होगी आपकी दिवाली खूबसूरत और रौशन

कराएं दिवाली की रात लक्ष्मी कुबेर यज्ञ, होगी अपार धन, समृद्धि  व्  सर्वांगीण कल्याण  की प्राप्ति : 27-अक्टूबर-2019
Astrology Services

कराएं दिवाली की रात लक्ष्मी कुबेर यज्ञ, होगी अपार धन, समृद्धि व् सर्वांगीण कल्याण की प्राप्ति : 27-अक्टूबर-2019

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Blog

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाक से कैसे पिछड़ गया भारत? भूख-कुपोषण से लड़ने में हम क्यों नाकाम!

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के कुल 117 मुल्कों में से इस बार हमारा नंबर 102 रहा है। पाकिस्तान हमसे ऊपर है। यह दो ऐसे तथ्य हैं जिन पर हमें भावनाओं से ऊपर उठकर सरकार, मीडिया और समाज की नीति, नियत को समझने का प्रयास करना ही चाहिए।

20 अक्टूबर 2019

विज्ञापन

सीएम योगी से मिलने के बाद बोलीं कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी- दोषियों को फांसी दी जाए

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी ने कहा है कि उन्होंने आश्वासन दिया कि न्याय किया जाएगा।

20 अक्टूबर 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree