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प्रतिरोध करती लड़कियां

manisha singhमनीषा सिंह Updated Fri, 14 Feb 2020 05:04 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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समाज में लड़कियों से छेड़छाड़ कैसे रोजमर्रा की बात बन गई है और कितना घिनौना रूप ले चुकी है, इसका एक उदाहरण पिछले दिनों राजधानी दिल्ली स्थित लड़कियों के प्रतिष्ठित गार्गी कॉलेज में मिला। वहां सालाना कल्चरल फेस्टिवल में भीड़ की ओट लेकर कथित तौर पर कॉलेज में घुसे बाहरी मर्दों ने लड़कियों से हद दर्जे की बदतमीजी की। पहले तो इन घटनाओं पर प्रिंसिपल ने कोई कार्रवाई नहीं की, पर मीडिया से लेकर संसद तक में मामला उठने पर घटना की एफआईआर दर्ज करवाई गई।
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सामान्य छेड़छाड़ का मामला न होकर यह घटना जश्न की आड़ में की जाने वाली बदतमीजी से जुड़ा है, जिसकी ओर आसानी से निगाह नहीं जाती। सार्वजनिक जगहों पर होने वाले समारोहों में ऐसी छेड़छाड़ आम हो चली है। जश्न के मौकों पर इंसान कैसे भेड़िये की शक्ल अख्तियार कर लेता है, इसका एक उदाहरण तीन साल पहले नए साल की पूर्वसंध्या पर आईटी हब कहे जाने वाले शहर बंगलूरू में मिला था। वहां सार्वजनिक जगहों पर सैकड़ों की संख्या में मौजूद शोहदों ने लड़कियों से सरेआम छेड़छाड़ की थी। शहरी दायरों में होने वाली ऐसी घटनाओं को देखकर एक बड़ी चिंता मन में यह उभरती है कि हमारे समाज में आधुनिक सोच ने जो थोड़ी-बहुत जगह पिछले कुछ अरसे में बनाई है, कामकाजी लड़कियों ने कदम-कदम पर संघर्ष करके अपने लिए जो कुछेक रियायतें हासिल की हैं, छेड़छाड़ के ऐसे हादसों के कारण उन पर तेजी से ग्रहण लग सकता है। दिल्ली और बंगलूरू की गिनती ऐसे शहरों के रूप में होती है, जहां लड़कियां आजाद इंसान की तरह जिंदा रहने के बारे में सोच सकती हैं। वहां भी अगर हैवानियत के ऐसे खेल चलेंगे, तो देश का कौन-सा कोना ऐसा है, जहां औरत-मर्द बराबरी की कल्पना की जा सकती है?

पुलिस बलों की कमी एक मुद्दा हो सकती है, पर यह मामला पुलिसिंग की खामियों तक सीमित नहीं। आखिर वह कौन-सी मानसिकता है, जो कुछ लोगों में यह दुस्साहस पैदा कर रही है कि वे भीड़ में नितांत अपरिचित लड़कियों, महिलाओं के साथ बदसलूकी करेंगे और उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा? उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का कुछ साल पहले का एक प्रसंग याद आता है, जहां सिखेड़ा क्षेत्र में छेड़छाड़ से परेशान लड़कियों के अभिभावकों ने कथित तौर पर अपने मकानों के बाहर लिखवा दिया था कि उनके मकान बिकाऊ हैं। महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों को देखते हुए भले ही केंद्र सरकार तमाम योजनाएं और कानून बना रही हो, पर छेड़छाड़ से लेकर छोटी बच्चियों तक से बलात्कार की घटनाएं साबित कर रही हैं कि धरातल पर हालात में कोई तब्दीली नहीं आ रही। छेड़छाड़ किस तरह राष्ट्रीय समस्या है, इसका एक अंदाजा 2017 में हरियाणा में भी लगा था। वहां स्कूल के रास्ते में मनचलों के डर से घर बैठने को मजबूर कुछ लड़कियों ने अपने गांव के स्कूल को अपग्रेड करने के लिए भूख-हड़ताल शुरू कर दी थी, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए बाहर के स्कूल में न जाना पड़े।

ये मनचले आखिर कौन हैं? वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों पर महिलाओं की शिकायत दर्ज करने वाली वुमन पावर लाइन 1090 के जरिये जेल भेजे गए अधिकतर लोग 50 साल से अधिक के थे। इन उम्रदराज अपराधियों में मानसिक बीमारियों के लक्षण पाए गए थे। ऐसे में, बेहतर यही है कि लड़कियों और महिलाओं को छेड़छाड़ का प्रतिरोध करना सिखाया जाए। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण अब शहरों के साथ गांव-देहात के स्कूलों में भी देने की जरूरत है।
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