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जाति प्रथा से भीषण है लैंगिक विषमता : पकड़े जाने पर उन्होंने आत्महत्या कर ली

taslima nasreenतस्लीमा नसरीन Updated Sat, 13 Jul 2019 08:22 AM IST
आर्टिकल 15 (फाईल फोटो)
आर्टिकल 15 (फाईल फोटो) - फोटो : social media
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जाति प्रथा पर आधारित फिल्म 'आर्टिकल 15' की इन दिनों काफी चर्चा है। दुनिया में जितनी भी निकृष्टतम प्रथाएं हैं, जाति प्रथा उनमें एक है। निचली जातियों के पुरुष और स्त्री, दोनों का ऊंची जातियां शोषण करती हैं। उसमें भी निचली जातियों की स्त्रियों का सर्वाधिक शोषण होता है। उनका सामूहिक बलात्कार कर उनके गले में रस्सियां बांधकर उन्हें पेड़ की डालियों से लटका दिया जाता है। मानो यह बर्बरता कम न हो, उनके बारे में अफवाह फैला दी जाती है कि वे गलत रास्ते पर चल पड़ी थीं, पकड़े जाने पर उन्होंने आत्महत्या कर ली।
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पिछड़ी और निचली जातियों के लोगों में खुद को हीन समझने की मानसिकता है। हालांकि शिक्षा के प्रसार और बढ़ती जागरूकता के कारण इस समाज के युवाओं की सोच बदल रही है। वे खुद को दूसरों के बराबर समझते हैं और अपना अधिकार भी मांगते हैं। लेकिन कुल मिलाकर निचली जातियों में सदियों से यह सोच बनी हुई है कि सवर्णों के सामने उन्हें कुर्सी पर नहीं बैठना चाहिए, अमीरी का प्रदर्शन करते हुए ऊंची जातियों के लोगों के सामने से नहीं निकलना चाहिए।

कुछ-कुछ जगह निचली जातियों के बीच यह अंधविश्वास तक व्याप्त है कि सवर्णों की जूठन पर लेटने से उनकी बीमारियां और दूसरी समस्याएं दूर होती हैं। ऐसे न जाने कितने अंधविश्वासों और गलत धारणाओं से हमारा समाज ग्रस्त है। जाति प्रथा और उससे जुड़ी मान्यताओं को ईश्वर का विधि-विधान माना जाता है। ऊंची जातियां इन प्रथाओं को जिस तरह ईश्वर का विधान कहती हैं, नीची जातियां भी इन्हें उसी तरह चुपचाप स्वीकार कर लेती हैं।
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