कविताः इलेक्ट्रॉन, प्राण की सत्ता में, ईश्वर का एक कण

Varun KumarVarun Kumar Updated Thu, 16 Aug 2012 11:39 AM IST
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श्री अरविंद
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इलेक्ट्रॉन जिन पर रूपों, जगतों के होते हैं आकार निर्मित,
प्राण की सत्ता में कूद पड़ा, ईश्वर का एक कण।
शाश्वत की ऊर्जा से अग्निकण हुआ एक विखंडित,
है यह अनंत का अंध सूक्ष्म निवासस्थल।

करते हैं शिव सवारी, उस प्रज्वलित लघु रथ के वाहन में।
एकमात्र एकम है बन गया रूपों में असंख्य;
रखता है अपने एकत्व को प्रच्छन्न अदृश्य छद्मावरण में,
हैं, जो शाश्वत प्रभु के कालगत नन्हे देवालय।

अपनी अदृश्य योजना में परमाणु और अणु सब
अनूठे एकत्वों के प्रासाद को देते अवलंबन,
स्फटिक, पादप, कृमि, पशु और मानव तक :
मानव,
जो कर लेगा अधिकृत विश्व एकता एक दिन।
अपनी आत्मा के
अग्निकण को करता हुआ विस्तृत,
प्रभु की असीमता की कालातीत विराटता को करता अभिव्यक्त।

अनुवाद : द्वारिका प्रसाद गुप्ता
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