विज्ञापन

कथा / लघुकथाः किताबों के सहारे कट गए पंद्रह साल

Varun Kumar Updated Tue, 14 Aug 2012 05:20 PM IST
Cut through the fifteen years of books
विज्ञापन
ख़बर सुनें
एंटन चेखोव
विज्ञापन
मशहूर लेखक चेखोव की शर्त नामक कहानी में एक युवा वकील को साहूकार से लगी शर्त के मुताबिक पंद्रह साल कारावास में बिताने थे। युवा ने किताबों के सहारे ही वे पंद्रह वर्ष काट दिए। आखिर कैसे, जानने के लिए पढ़िए उसी कहानी का एक अंशः-

साहूकार ने मेज से कागज उठाया और पढ़ाः `कल बारह बजे मुझे दूसरे लोगों से मिलने-जुलने की आजादी और हक मिल जाएगा। लेकिन यह कमरा छोड़ने और सूरज की रोशनी देखने से पहले मैं आपसे कुछ कहना जरूरी समझता हूं।'
`विशुद्ध अंतःकरण से जैसे भगवान के सामने जो मुझे देखता है, आपसे कहता हूं कि मैं आजादी, जिंदगी और तंदुरुस्ती को तिलांजलि देता हूं और यह सब कुछ आपकी किताबों के मुताबिक संसार की अच्छी चीजों में गिनी जाती हैं।

पंद्रह साल मैंने सांसारिक जिंदगी का बड़ा गहन अध्ययन किया। यह सही है कि मैंने न तो इस दुनिया को और न ही लोगों को देखा, पर आपकी किताबों में मैंने सुगंधित वाइन पी, गाना गाया, जंगल में हिरन और जंगली सुअरों का शिकार किया और औरतों से प्यार किया...। आपके प्रतिभाशाली कवियों के जादू द्वारा चित्रित बादलों जैसी पारलौकिक सुंदरता रात में मुझसे मिलने आई और मेरे कानों में अद्भुत कहानियां फुसफुसा गई, जिसने मेरे दिलोदिमाग को झंझोड़ कर रख दिया।

आपकी किताबों में मैं इलबर्ज और मौंट ब्लांक की चोटियों पर चढ़ा और वहां से मैंने सूर्योदय देखा और शाम ढलते-ढलते देखा उसके सुनहरे किरमिजी रंग को आकाश, सागर और पहाड़ों की चोटियों पर बिखरते। मैंने वहां से सिर के ऊपर चमकते देखा गरजते बादलों को चीरती बिजली, मैंने देखा हरे-भरे जंगल, खेत, नदियां, झीलें और शहर।

सायरन की आवाज सुनी और सुनी चरवाहे की बंसी की तान। मैंने मनोहर अपदूतों के पंखों को छुआ, जो उड़कर मेरे पास आए ईश्वर के बारे में बात करने...। आपकी किताबों में मैंने नरक में छलांग लगाई, चमत्कार किया, हत्याएं की, शहरों को आग लगाई, नए धर्मों का प्रचार किया और सारी दुनिया जीत ली...। आपकी किताबों ने मुझे विवेक दिया। वह सबकुछ जिसे मनुष्य ने अपनी अथक सोच से सदियों से सृजित किया था। मेरे दिमाग की इस छोटी परिधि में समा गया है। मुझे मालूम है कि मैं आप सभी लोगों से ज्यादा बुद्धिमान हूं।’
प्रस्तुति : पंकज मालवीय

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Opinion

भुला दिए गए भारतीय योद्धा

भारतीय सैनिकों की विपुल संख्या, जितने मोर्चों पर वे लड़े और जितनी कठिनाइयां उन्होंने झेली, इन सबको देखते हुए उनके योगदान की उपेक्षा करके उस महायुद्ध का कोई भी विवरण पूरा नहीं हो सकता।

13 नवंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

प्रचार करने पहुंचीं मुख्यमंत्री की पत्नी पर भड़की महिला, सुनाई खरी-खोटी

चुनाव की तारीख का एलान होते ही पार्टियां अपने प्रचार-प्रसार में जोरों-शोरों से लग गई हैं। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के प्रचार के लिए जब उनकी पत्नी साधना रेहाटी गांव पहुंचीं तो उन्हें खरी-खोटी सुनने को मिली।

13 नवंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree