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मंदी पर चिदंबरम

तवलीन सिंह Updated Sun, 08 Dec 2019 07:07 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह - फोटो : a
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सौ दिन बाद पूर्व वित्त मंत्री पिछले सप्ताह तिहाड़ जेल से रिहा हुए और खुली हवा में सांस लेते ही उन्होंने मोदी सरकार की दुखती रग छू दी। इस सरकार की दुखती रग एक ही है और वह है अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे बादल। कभी जहां ये बादल सिर्फ अर्थशास्त्रियों और रणनीतिक पंडितों को दिखते थे, वहीं अब प्याज़ के दाम ऐसे बढ़ गए हैं कि आम आदमी को भी एहसास होने लग गया है कि समस्या गंभीर है। कई महीनों से ग्रामीण क्षेत्रों से जानकारी मिलती रही है कि किसानों का हाल अब इतना खस्ता हो गया है कि बिस्कुट जैसी चीज भी बिक नहीं रही।
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लगता है कि पी चिदंबरम तिहाड़ जेल से पूरी तैयारी करके निकले हैं, लेकिन उनका काम वर्तमान वित्त मंत्री ने भी थोड़ा आसान किया। लोकसभा में जब निर्मला सीतारमण से पूछा गया कि क्या उनको मिस्र से आयात किए गए प्याज खाकर मजा आ रहा है, तो उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि उनके परिवार में लहसन-प्याज खाए ही नहीं जाते। उनकी चतुराई काम न आई, क्योंकि सौ दिन बाद पहली बार संसद में जाने से पहले पत्रकारों से भेंट करते हुए चिदंबरम ने यह कहकर वित्त मंत्री का मजाक उड़ाया कि निर्मला सीतारमण क्या एवोकाडो खाती हैं? यह विदेशी फल इतना महंगा है कि इसे देश में सिर्फ वे लोग खा सकते हैं, जो धनवानों की श्रेणी में आते हैं।

तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद चिदंबरम ने पत्रकार सम्मेलन बुलाया, जहां उन्होंने न मजाक किया, न तंज कसा। पूरी गंभीरता से उन्होंने देश के आर्थिक हाल का विश्लेषण किया और आंकड़ों द्वारा साबित किया कि किस तरह हर आर्थिक स्तर पर मोदी सरकर नाकाम रही है। अर्थव्यवस्था की वार्षिक वृद्धि दर कभी आठ प्रतिशत थी, जो अब आधी हो गई है। बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि माना जाता है कि 45 वर्ष बाद उसका यह हाल देखने को मिल रहा है। पूर्व वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था में मंदी का सारा दोष  मोदी सरकार पर थोपा। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में उनको इसलिए मंदी कम होते नहीं दिखती, क्योंकि उनकी राय में नरेंद्र मोदी जानते ही नहीं हैं कि मंदी दूर करने के लिए कौन से कदम उठाने जरूरी हैं।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि जो लोग मोदी की मदद कर सकते थे, उनको भगा दिया गया है। इस सूची में उन्होंने रघुराम राजन, अरविंद सुब्रमण्यन, अरविंद पनगढ़िया और ऊर्जित पटेल के नाम लिए। जब चिदंबरम से किसी पत्रकार ने पूछा कि मंदी दूर करने के लिए उनकी नजर में जरूरी पांच कदम क्या होने चाहिए, तो उन्होंने जवाब दिया कि सरकार जब उनको सलाह-मशविरा करने के लिए बुलाएगी, तब वह अपने सुझाव देंगे।

सच यह है कि मोदी ने अपने दूसरे दौर में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लिए हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन जहां तक अर्थव्यवस्था की बात है, तो यहां कोई नई पहल नहीं दिखी है। मुंबई में कई बड़े उद्योगपति चुपके से कहते हैं कि वे उम्मीद हार चुके हैं। इनमें से बहुत कम लोग हैं, जिनमें खुलकर बोलने की हिम्मत है, क्योंकि फौरन उनको दंडित करने के प्रयास शुरू हो जाते हैं। पिछले सप्ताह राहुल बजाज ने जब अमित शाह के सामने कहा कि देश में डर का माहौल छाया हुआ है, तो सोशल मीडिया पर फौरन बजाज साहब को बदनाम करने वाले वरिष्ठ मंत्रियों के ट्वीट आने लगे। इन सबका एक ही संदेश था कि राहुल बजाज झूठ बोल रहे हैं। उनकी नहीं सुनी गई, तो पूर्व वित्त मंत्री की कौन सुनेगा? अच्छे दिन आ गए हैं दोस्तो।
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