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बुंदेलखंड के विकास की रूपरेखा: विकास बोर्ड के सुझावों पर अमल हो तो बदलेगी तस्वीर

राजा बुंदेला Updated Thu, 18 Jul 2019 03:10 AM IST
बुंदेलखंड में पानी की समस्या विकराल रहती है
बुंदेलखंड में पानी की समस्या विकराल रहती है - फोटो : Amar Ujala
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हाल ही में उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने बुंदेलखंड विकास बोर्ड बनाकर एक पहल की है। बुंदेलखंड के प्रत्येक जिले से एक-एक प्रतिनिधि चुनकर एक टीम बनाई और सबसे अनुरोध किया गया कि राज्य और केंद्र सरकार की मौजूदा योजनाओं के मद्देनजर वे बुंदेलखंड के विकास के लिए अपने सुझाव दें, जिन पर मुख्यमंत्री भी विवेचना करेंगे।
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अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि के बावजूद बुंदेलखंड का जैसा विकास होना चाहिए था, वैसा नहीं हो सका है। बुंदेलखंड विकास बोर्ड के गठन के रूप में राज्य सरकार की पहल से इस जड़ता को तोड़ने में मदद मिलेगी। बोर्ड की पहली बैठक में सभी सदस्यों ने सुझाव दिए। बुंदेलखंड के विकास के लिए मैंने वर्षों संघर्ष किया है। मैंने भी कुछ सुझाव दिए, जो न केवल इस भूभाग के विकास की दृष्टि से बल्कि रोजगार सृजन और पलायन पर रोक की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होंगे।

बुंदेलखंड में पानी की समस्या विकराल रहती है, लेकिन मौजूदा केंद्र और राज्य सरकार ने इस दिशा में प्रभावी पहल की है। राज्य सरकार ने सिंचाई एवं पेयजल के लिए पाइप के जरिये पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की है। गायों को सड़क पर छुट्टा छोड़ देने की समस्या भी वहां बहुत ज्यादा है, उसके लिए राज्य सरकार ने हर गाय की देखभाल के लिए प्रति महीने नौ सौ रुपये देने की व्यवस्था की है और जो अपनी गायों को छुट्टा छोड़ेंगे, उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।

मेरा मानना है कि प्रत्येक जिला योजना की बैठकों में बोर्ड के सदस्यों की भागीदारी हो, ताकि इसकी जानकारी रहे कि केंद्र और राज्य से किस विभाग के लिए कितना पैसा आ रहा है और उसका उपयोग कब से होगा। पूरे बुंदेलखंड में एक भी राष्ट्रीय डेयरी नहीं है। अगर यह सुविधा उपलब्ध हो, तो न केवल दुग्ध व्यवसायियों को फायदा होगा, बल्कि बहुत से लोगों को इस व्यवसाय से जोड़ा जा सकेगा।

जिस बुंदेलखंड ने गामा पहलवान से लेकर मेजर ध्यानचंद जैसे खिलाड़ी दिए, वहां आज खेल के नाम पर कुछ भी नहीं है। इसलिए इस भूभाग में स्पोर्ट्स अकादमी खोलने से इस क्षेत्र के युवाओं को एक बेहतर भविष्य दिया जा सकता है। इसी तरह लोक कलाओं, लोक नृत्यों के साथ-साथ हस्त शिल्प और अन्य विधाओं को संजोने तथा लोगों को स्वस्थ मनोरंजन देने के लिए फाइन आर्ट्स सेंटर का होना जरूरी है, जिसे सांग ऐंड ड्रामा डिविजन तथा संगीत नाटक अकादमी से जोड़ा जा सकता है। इनसे रोजगार सृजन के साथ पलायन पर रोक लगेगी।

बुंदेलखंड अपनी जड़ी-बूटियों तथा खनिज संपदा के लिए जाना जाता है। अगर इससे संबंधित कोई प्रसंस्करण इकाई खोली जाए, तो लोगों को रोजगार मिलने के अलावा किसानों को खेती से जोड़कर रखा जा सकता है। ग्रामीण महिलाओं के समूह बनाकर चंदेरी साड़ी, महेश्वर साड़ी और रानीपुर कॉटन के साथ पापड़, बड़ी, अचार, सिवइयां आदि का उत्पादन शुरू करने के लिए माइक्रो बैंकिंग व्यवस्था को अमल में लाने की जरूरत है। इससे महिलाएं स्वाबलंबी बन सकती हैं।

इस दिशा में कैफी आजमी के गांव मेजुवां में शबाना आजमी द्वारा की गई पहल पर गौर किया जा सकता है। बुंदेलखंड में न तो कोई हवाई अड्डा है और न ही ड्राइ पोर्ट। बाहरी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इस तरह की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है। राज्य सरकार पर राजस्व का बोझ न पड़े, इसके लिए बुंदेलखंड में इनवेस्टर समिट का आयोजन किया जा सकता है। इन सुझावों पर मुख्यमंत्री ने अमल करने की बात कही है। ऐसा होने पर बुंदेलखंड विकास की मुख्यधारा से निश्चित रूप से जुड़ जाएगा।

(लेखक बुंदेलखंड विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं)
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