व्यंग्यः तरक्की करनी है तो कुत्ते से डॉगी बनो

Varun Kumar Updated Thu, 16 Aug 2012 10:38 AM IST
be doggy If you wish to be elevated
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सुधीर विद्यार्थी
साधो, गांव और शहर के कुत्तों में बुनियादी फर्क है। गांव में कुत्तों को कुत्ता कहा जाता है, जबकि शहर में वे डॉगी कहलाते हैं। डॉगी का अपना जलवा होता है, जो कुत्तों को नसीब कहां। गले में पट्टा और महंगी चेन। अगर मालिक के हाथ में उसका एक सिरा थमा हो, तो डॉगी का भी रौब बढ़ता है और मालिक का भी। डॉगी यदि आपके पास से गुजर रहा हो, तो उसे आप ‘धत्’ नहीं कह सकते, बल्कि उसकी आंखें और थोबड़ा देखकर आप डरेंगे और सड़क पर एक किनारे हट जाएंगे। उन क्षणों में आप डॉगी को हसरत भरी नजर से देखेंगे, पर वह आप पर हिकारत भरी दृष्टि डालकर आगे बढ़ जाएगा। ऐसे में उसके कुत्ता होने पर आपके खीजने का कोई अर्थ नहीं है।

दरअसल वह कुत्ता है ही नहीं। वह कुत्ते से ऊपर उठकर डॉगी की श्रेणी में पहुंच चुका है। उसका वर्ग बदल गया है। उसके भीतर की वर्गचेतना ने अब पुराना चोला उतार कर नया पहन लिया है। वह डॉगी की उच्च जमात में शामिल हो चुका है। अब वह अपने पहले वाले वर्ग से नफरत करने लगा है। उन्हें देखकर वह कुछ गंदी गालियां भी फेंकता है, साले, कुत्ते कहीं के। सर्वहारा बने रहने का कोई मतलब नहीं है।

अगर तरक्की करना है, तो कुत्ते नहीं, डॉगी बनना होगा। अपना भाग्य बदलने के लिए बस तुम्हें गले में एक अदद पट्टे और पूंजीपति मालिक की दरकार है। तुम गांव और सड़क के आवारा कुत्ते हो। तुम्हें तो करीने से पूंछ हिलाना भी नहीं आता, जबकि डॉगी होकर अपनी स्वामिभक्ति दिखाने के लिए हमें और ज्यादा कामयाब तौर-तरीकों का प्रदर्शन करना पड़ता है। यह गुलामी नहीं, तरक्की का रास्ता है। इस पर चले बिना मुक्ति नहीं। सर्वहारा क्रांति का सपना अब निरर्थक हो चुका है।

डॉगियों की बात सुनकर कुत्ते अब विचलित होने लगे हैं। अब वे गांव से शहर आते हैं, तो डॉगियों को देखकर भौंकते नहीं, बल्कि अपने नसीब को कोसते हैं, काश, हम भी डॉगी होते। वे डॉगी होना चाहते हैं, पर उनके पास वह सलाहियत नहीं। वे दूसरे कुत्तों से मिलकर डॉगी होने की तरकीबें पूछते हैं। वे आलीशान कोठियों की तरफ जाना चाहते हैं, पर उन्हें जगह नहीं मिलती। उनका कुत्ता होना आड़े आ जाता है। वे अपने कुत्तापन से पीछा छुड़ाना चाहते हैं। वे अपने सर्वहारापन से भी मुक्ति चाहते हैं। समय का फेर है कि वे अब डॉगी बनकर अपनी तरक्की का रास्ता तलाश करने में जुट गए हैं।

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