वास्तविक संत की पहचान

Yashwant Vyas Updated Sat, 08 Sep 2012 12:00 PM IST
हमारे नीतिशास्त्रों में कहा गया है कि महज कपड़े पहन लेने से कोई संन्यासी नहीं हो जाता, बल्कि वास्तविक संत बनने के लिए सेवा रूपी तप की साधना करनी पड़ती है। अगर कोई व्यक्ति सेवा में अपना जीवन गुजार रहा है, तो उसे सच्चा संत समझना चाहिए।

अजमेर में संन्यासी दयानंद जी का निर्वाण अर्द्धशताब्दी समारोह हो रहा था। देश भर के आर्य संन्यासी तथा विद्वान समारोह में उपस्थित थे। महान शिक्षा सेवी महात्मा हंसराज भी लाहौर से समारोह में भाग लेने आए हुए थे।
आर्य संन्यासी स्वामी सर्वदानंद की कुटिया में कुछ आर्य समाजी संत आए और उनसे कहा, स्वामी जी, हम सबकी यह इच्छा है कि महात्मा हंसराज जैसी दिव्य विभूति से संन्यास ग्रहण करने की प्रार्थना की जाए।

स्वामी सर्वदानंद ने उनसे कहा, जिन महात्मा हंसराज ने अपना संपूर्ण जीवन आर्य समाज के प्रचार तथा जगह-जगह विद्यालयों की स्थापना के लिए समर्पित किया हुआ है, क्या उन्हें आप गेरुआ वस्त्र न पहनने के कारण संन्यासी नहीं मानते हैं। संन्यासी या साधु केवल कपड़े रंग लेने से नहीं बनता। जिसका मन परोपकार तथा सेवा के कार्यों में रम गया है, वह तो स्वतः संन्यासी की श्रेणी में आ जाता है। कपड़े रंगने के बाद भी जो अपना जीवन सेवा तथा धर्म प्रचार में नहीं लगाता, उसे साधु कैसे कहा जा सकता है? संन्यासी की व्याख्या सुनकर सभी गद्गद हो उठे।

Spotlight

Most Read

Opinion

स्टैंड अप क्यों नहीं हो रहा है इंडिया

सरकार की अच्छी नीयत से शुरू की गई योजना जब वास्तविक जमीन पर उतरती है, तो उसके साथ क्या होता है, यह उसका एक बड़ा उदाहरण है।

10 जनवरी 2018

Related Videos

सोशल मीडिया ने पहले ही खोल दिया था राज, 'भाभीजी' ही बनेंगी बॉस

बिग बॉस के 11वें सीजन की विजेता शिल्पा शिंदे बन चुकी हैं पर उनके विजेता बनने की खबरें पहले ही सामने आ गई थी। शो में हुई लाइव वोटिंग के पहले ही शिल्पा का नाम ट्रेंड करने लगा था।

15 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper