कृष्ण के नीले होने का राज

Yashwant Vyas Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
स्वामी विवेकानंद मद्रास के लॉ कॉलेज के हॉस्टल में ठहरे हुए थे। जिस कमरे में उन्हें ठहराया गया था, उसकी दीवार पर भगवान श्रीकृष्ण का एक आकर्षक चित्र लगा हुआ था। एक दिन दर्जन भर से अधिक छात्र स्वामी जी से बातचीत करने के लिए हॉस्टल पहुंचे। बातचीत के क्रम में स्वामी विवेकानंद अचानक छात्रों से पूछ बैठे, भगवान श्रीकृष्ण का रंग नीला क्यों है?

एक छात्र ने कहा, श्रीकृष्ण ने जब वृंदावन में यमुना नदी में घुसकर शेषनाग से संघर्ष किया था, तब शेषनाग की जहरीली फुंकार से उनका रंग नीला हो गया था। स्वामी जी ने मुसकराकर कहा, ऐसा नहीं है। अन्य कोई बताए कि श्रीकृष्ण का रंग नीला क्यों था। एक छात्र खड़ा हुआ तथा उसने कहा, स्वामी जी, मेरे विचार से तो चूंकि भगवान श्रीकृष्ण असीम शक्तियों के स्वामी हैं, इसलिए उनका रंग नीला है।

जो शाश्वत और असीम होता है, वह नीले रंग का प्रतीक है। सागर तथा आसमान की कोई सीमा नहीं है, सृष्टि की कोई सीमा नहीं है, इनका भी रंग नीला है। इसी प्रकार असीम शक्ति और असीम गुणों के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण का रंग भी नीला है। स्वामी जी ने उपरोक्त उत्तर देने वाले छात्र की पीठ थपथपाकर कहा, तुम भविष्य में खूब ख्याति प्राप्त करोगे। यह छात्र चक्रवर्ती राजगोपालाचारी थे, जो स्वाधीन भारत के अंतिम गवर्नर जनरल बने।

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