हनुमान के प्रति श्रीराम का प्रेम

Yashwant Vyas Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
धर्मशास्त्रों में यह बताया गया है कि किस तरह एक साधारण भक्त भी अपने कार्यों से भगवान को प्रसन्न कर देता है। ऐसे भक्त अपने प्रभु की कृपा तो पाते ही हैं, तमाम सांसारिक कष्टों से मुक्त होकर मोक्ष भी प्राप्त करते हैं। हनुमान जी का नाम भी ऐसे ही भक्तों में लिया जाता है। एक दिन वह लंका स्थित अशोक वाटिका में भगवान श्रीराम के विरह में व्याकुल सीता जी के सामने थे।
कुछ ही क्षण पूर्व उन्होंने एक वृक्ष की ओट में बैठे-बैठे देखा था कि माता सीता जीवन से निराश होकर अपनी लंबी चोटी को फंदा बनाकर आत्महत्या तक करने को उन्मुख थीं। महावीर बोले, माताश्री, मैं अभी आपको अपनी पीठ पर बिठाकर लंका से ले जाने को तत्पर हूं। सीता जी ने उत्तर दिया, हनुमंत, मैं क्षत्राणी हूं। यदि चोरी-छिपे मैं गई, तो श्रीराम का आदर्श स्वरूप कलंकित होगा।

हनुमान जी ने वचन दिया, माताश्री, अब आपको अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। मैं लंका से लौटने से पूर्व रावण को अपनी शक्ति का एहसास कराना चाहता हूं। और हनुमान ने लंका में ऐसा उधम मचाया कि रावण की नींद हराम हो गई। इसके कुछ ही दिनों के बाद श्रीराम ने रावण का संहार कर दिया। सीता जी ने विजयी श्रीराम सेना के बीच हनुमान को देखा, तो उनके वचन को याद कर उनकी आंखें नम हो उठीं। श्रीराम स्वयं यह जानते थे कि लंका तक उन्हें पहुंचाने का श्रेय वस्तुतः हनुमान जी को है। वह मन ही मन अपने अनूठे भक्त के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने लगे।

Spotlight

Most Read

Opinion

University of Bergen: क्लीनिंग स्प्रे धूम्रपान की तरह ही हानिकारक

नार्वे की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्गेन के शोधकर्ताओं ने यूरोपीय समुदाय श्वसन स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान 6235 भागीदारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है।

19 फरवरी 2018

Related Videos

एकाउंटर का खौफ, थाने पहुंचकर बोला 'गोली मत मारो, जेल में डालो'

यूपी पुलिस जिस तरह ताबड़तोड़ बदमाशों के एनकाउंटर में लगी है, उससे बदमाशों में पुलिस का खौफ साफ नजर आने लगा है।ताजा मामला यूपी के शामली जिले का है जहां एक हत्या का आरोपी खुद थाने पहुंचा।

20 फरवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Switch to Amarujala.com App

Get Lightning Fast Experience

Click On Add to Home Screen