वाणी पर पूर्ण नियंत्रण जरूरी

Yashwant Vyas Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
एक बार प्रजापति ब्रह्मा जी के दर्शन के लिए कुछ साधक पहुंचे। एक जिज्ञासु ने ब्रह्मा जी से पूछा, ऐसे कौन से कार्य हैं, जिनके करने से जीव को सभी बंधनों से मुक्ति मिल सकती है? ब्रह्मा जी ने कहा, क्षमा, सत्य, सरलता और दया ऐसे दैवी गुण हैं, जिनका अनुपालन करने मात्र से जीव मुक्ति पा जाता है।
ब्रह्मा जी उपदेश देते हुए कहते हैं, वेदस्योपनिषत् सत्यं सत्यस्योपनिषद् तमः दमस्योपनिषन्मोक्ष एतत सर्वानुशासनम्।। वेदाध्ययन का सार है सत्यभाषण, सत्यभाषण का सार है इंद्रिय संयम और इंद्रिय संयम का फल है मोक्ष। जीवन में तप, इंद्रिय संयम, सत्यभाषण और मनोनिग्रह कार्य सबसे उत्तम हैं। अतः इंद्रिय संयम का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। वह आगे बताते हैं, मानव को चाहिए कि वह प्रिय-अप्रिय की स्थिति में समभाव रहे। किसी के मर्म को आघात न पहुंचाए, निष्ठुर वचन न बोले। वचन रूपी बाण जब मुंह से निकल जाते हैं, तब उनके द्वारा बींधा गया मनुष्य हर क्षण उद्विग्न रहता है। अतः वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रखकर सभी के प्रति मधुर वचन ही बोलने चाहिए।

ब्रह्मा जी कहते हैं, जो दूसरों के द्वारा अपने लिए कटु वचन कहे जाने पर भी उसके प्रति कठोर शब्द नहीं बोलता, किसी के द्वारा चोट खाकर भी उसके अहित की नहीं सोचता, ऐसे महात्मा से मिलने के लिए देवता भी सदा लालायित रहते हैं। इसलिए कहा भी गया है, तस्येह देवाः स्पृहयन्ति नित्यम्।

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