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धृतराष्ट्र जब चुप हो गए

Yashwant Vyas Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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विदुर ने श्रीकृष्ण का सत्संग और धर्मशास्त्रों का गहन अध्ययन कर अथाह पांडित्य प्राप्त किया था। वह विदुर ही थे, जो धृतराष्ट्र के समक्ष निर्भयता से यह कहने का साहस कर पाए कि पुत्र मोह उनकी बुद्धि ऐसी भ्रष्ट करेगा कि जानते हुए भी वह अन्याय का मूक समर्थन कर वंश नाश का कारण बनेंगे।
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धृतराष्ट्र समय-समय पर महात्मा विदुर के उपदेश सुना करते थे। एक बार धृतराष्ट्र ने कहा, तात, कौरव-पांडवों के बीच के विवाद को जानकर मैं चिंतित हूं। मेरी नींद न जाने कहां गायब हो गई है।
महात्मा विदुर ने कहा, राजन, जिस साधनहीन दुर्बल का अपने से बलवान के साथ विरोध हो जाता है, जिसका सब कुछ छीन लिया गया है, जो कामी और चोर है, उसे रात में नींद नहीं आती। कहीं आपका भी इन घातक दोषों से संपर्क तो नहीं हो गया है। कहीं पुत्र मोह में फंसकर अन्याय सहन करते रहने के कारण तो यह कष्ट नहीं हो रहा है?
विदुर आगे कहते हैं, श्रेष्ठ लक्षणों से संपन्न युधिष्ठिर की अवहेलना तथा अनेक दुर्गुणों से युक्त अपने पुत्र दुर्योधन का अंधमोह ही आपके समस्त दुखों का कारण है। धर्मात्मा और धर्म का जानकार होते हुए भी जो व्यक्ति अधर्म का अंध समर्थन करता है, वह अपने जीवन को अपने ही हाथों नष्ट करता है। आप पुत्रमोह के आगोश में फंसने के कारण पांडवों के साथ अन्याय कर रहे हैं। इससे आपका अहित ही होगा। विदुर की यह चेतावनी सुनकर धृतराष्ट्र चुप हो गए।
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