कमजोर नीतियां बदहाल ढांचा

Mrinal Pandey Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
Weak policy framework tattered
ख़बर सुनें
देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति 1991 के गंभीर आर्थिक संकट के शुरुआती दिनों की याद दिलाती है। तब का आर्थिक संकट कांग्रेस सरकार के चार दशकों की अक्षम नीति का परिणाम था। एक बार फिर अक्षम नीतियों के चलते देश दोराहे पर खड़ा है। भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के चलते देश की जनता कराह रही है। जनता के वोट और विश्वास से चुनकर आई कांग्रेस-यूपीए सरकार आज जनता के साथ विश्वासघात कर रही है। प्रधानमंत्री को एक बड़ा अर्थशास्त्री माना जाता है, लेकिन आजकल उनका अर्थशास्त्र जन-विरोधी अर्थशास्त्र का रूप ले चुका है। पिछले कुछ दिनों में विकास दर के आंकड़े डराने वाले हैं, विकास दर नौ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
जब 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में एनडीए सत्ता में आया था, तब विकास दर पांच प्रतिशत से भी कम थी। देश की आधारभूत संरचना की स्थिति बुरी तरह से बिगड़ी हुई थी। लेकिन, उस सरकार ने इन चुनौतियों को मजबूती से स्वीकार किया और जनहित में कई ऐसे फैसले लिए, जो आज भी मिसाल हैं। तब की वाजपेयी सरकार ने सबसे पहले आधारभूत संरचना के विकास पर ध्यान दिया। इसके अंतर्गत सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, रेलवे और सिंचाई के विकास पर सबसे ज्यादा काम किया गया।

साथ ही, उसने वित्तीय सुदृढ़ीकरण को भी नजर अंदाज करने की कोई गलती नहीं की। इस दिशा में बीमा, बैंकिंग, दूरसंचार, ऊर्जा और जमीन अधिग्रहण जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए। उस सरकार ने विनिवेश कार्यक्रम को बड़े ही अच्छे तरीके से चलाया। इन सबके बीच ऐसा नहीं था कि उसे किसी बड़ी मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ा हो। अपने कार्यकाल के दौरान उसे न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतररराष्ट्रीय कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा।

महाशक्तिशाली देशों की कतार में लाने के लिए किए गए ऐतिहासिक पोकरण विस्फोट के एवज में देश को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तीन बार बढ़ोतरी हुई और देश में भयंकर सूखा की स्थिति पैदा हुई, सो अलग। लेकिन, इन सबके बावजूद तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने अपनी नीतियों के चलते मंद पड़ी अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाया और उसे तेजी से विकास की ओर ले जाने वाली अर्थव्यवस्था में बदल दिया।

लेकिन, आज हम हर क्षेत्र में पिछड़ते जा रहे हैं। रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) सात प्रतिशत के नीचे है, निर्यात छह प्रतिशत से कम हो गया है। राजकोषीय घाटा 4.6 प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से काफी आगे निकल गया है, और जीडीपी के छह प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पिछले साल के 8.5 प्रतिशत के मुकाबले -3.5 प्रतिशत तक गिर चुका है। ब्याज कर दरें काफी ऊंची हैं। देश की अर्थव्यवस्था की यह तसवीर और भी भयावह है। महंगाई ने पिछले सारे रिकॉड तोड़ डाले हैं। पेट्रोल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने से देश की आम जनता का मासिक बजट बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। देश में बेरोजगारी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।

इन सबके बावजूद वर्तमान केंद्र सरकार की ओर से कोई भी ऐसा गंभीर, तार्किक और प्रभावपूर्ण कदम नहीं उठाया जा रहा, जो देश को एक नई दिशा और दशा दे सके। इसके उलट कैबिनेट के अंदर ही गंभीर मतभेद हैं। लोकतंत्र में मतभेद का होना स्वाभाविक है। लेकिन इस बात को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए कि जिस जनता ने हम पर भरोसा कर देश की चाभी हमारे हाथ में दी है, उन्हें हम धोखा न दें, उन्हें हम निराश न करें।

आज केंद्र सरकार को दिमाग और दिल, दोनों से आत्म-मंथन करने की जरूरत है। सरकार को विपक्षी पार्टियों को विश्वास में लेकर देश की अर्थव्यवस्था को बचाने में जुट जाना चाहिए। उसे अपनी नाकामियों का ठीकरा विपक्षी दलों पर फोड़ने की पुरानी आदत है। सरकार को इससे बाज आकर देश निर्माण में विपक्षी दलों का सहयोग लेकर काम करना चाहिए।

Spotlight

Most Read

Opinion

कट्टरवाद और तुष्टिकरण की राजनीति

कोलकाता में हवाई अड्डे के दूसरे नंबर के रनवे के पास स्थित एक मस्जिद को हटाने की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही है, पर कोई राजनेता यह जोखिम लेने को तैयार नहीं, क्योंकि ऐसे में उन्हें मुस्लिम वोट नहीं मिलेंगे।

16 जुलाई 2018

Related Videos

अखिलेश यादव का पीएम मोदी पर वार समेत 5 बड़ी खबरें

अमर उजाला टीवी पर देश-दुनिया की राजनीति, खेल, क्राइम, सिनेमा, फैशन और धर्म से जुड़ी से जुड़ी खबरें। देखिए LIVE BULLETINS - सुबह 7 बजे, सुबह 9 बजे, 11 बजे, दोपहर 1 बजे, दोपहर 3 बजे, शाम 5 बजे और शाम 7 बजे।

16 जुलाई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree

अमर उजाला ऐप चुनें

सबसे तेज अनुभव के लिए

क्लिक करें Add to Home Screen