वेल्स फार्गो

Mrinal Pandey Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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संपत्ति के लिहाज से अमेरिका का चौथा सबसे बड़ा बैंक वेल्स फार्गो शीघ्र ही अपने देश में भी नौकरियां बांटने वाला है। बैंक की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिहाज से किए जा रहे इस विस्तार के तहत भारत और फिलीपिंस जैसे देशों में लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाएगा। हालांकि कंपनी का यह भी दावा है कि वह हैदराबाद और बंगलुरु के अपने कार्यालयों में पहले से ही करीब तीन हजार लोगों को रोजगार दे रहा है।
वेल्स फार्गो का सफर 18 मार्च, 1852 को शुरू हुआ। इसकी स्थापना के पीछे भी दिलचस्प कहानी है। असल में, 1848 में जब कैलीफोर्निया में सोने का भंडार मिला, तो उत्तरी अमेरिका के कई उद्यमी और वित्तीय कंपनियों के संचालक अपना हित साधने वहां पहुंचे। इनमें हेनरी वेल्स और विलियम जी फार्गो भी शामिल थे।

दोनों ने यहां पार्सल अथवा छोटे पैकेट आदि सामानों की रेलवे द्वारा ढुलाई से संबंधित काम शुरू किया। वर्ष 1849 में एक अन्य कंपनी बटरफील्ड ने भी यही काम शुरू कर दिया। प्रतियोगिता बढ़ती देख तीनों कंपनियों ने हाथ मिलाया और 1850 में अमेरिकन एक्सप्रेस नामक एक नई कंपनी की नींव रखी। लेकिन पश्चिमी हिस्से में एडम्स ऐंड कंपनी के उभरने से वेल्स और फार्गो ने बैंकिंग सर्विस की तरफ ध्यान देना शुरू किया और वेल्स फार्गो की नींव रखी।

शेयर के हिसाब से आज वेल्स फार्गो अमेरिकी बैंकों में शीर्ष पर है। वर्ष 2007 में स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने इसकी रेटिंग ट्रिपल ए की थी। हालांकि हालिया वित्तीय संकट में इसकी रेटिंग डबल ए माइनस है, तब भी शेयरधारकों का इस पर विश्वास कायम है। 9,000 से अधिक शाखाओं वाले वेल्स फार्गो के मुखिया जॉन जी स्तम्फ हैं। इसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को में है।

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