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राष्ट्रीय बचत पत्र

Mrinal Pandey Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
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सरकार ने राष्ट्रीय बचत पत्र पर परिपक्वता अवधि छह वर्ष से घटाकर पांच वर्ष कर दी है। इक्विटी, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान आदि जैसे निवेश के नए-नए साधन आने के बाद राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) की तरफ लोगों का रुझान थोड़ा कम जरूर हुआ है, पर सुरक्षित रिटर्न और सरकारी गारंटी होने के कारण यह अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में खरीदा जा रहा है।
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एनएससी की शुरुआत निवेश के वैकल्पिक साधन के रूप में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी। मंशा यह थी कि लोगों में बचत की आदत विकसित की जाए और इसी बहाने राष्ट्रीय कोष को भी मजबूती प्रदान की जाए। यह पत्र डाकघर द्वारा जारी किया जाता है, जो नोडल एजेंसी की भूमिका निभाता है। यह पत्र निवेश का ऐसा साधन है, जिसमें निवेश के वक्त टैक्स में फायदा तो मिलता ही है, निवेश की अवधि के दौरान और परिपक्वता अवधि पूरी होने पर भी 80 (सी) के तहत टैक्स में छूट मिलती है।

संसद में पारित डाकघर राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र अध्यादेश-1944, राष्ट्रीय बचत योजना-1992 और एनएससी (आठवीं) निर्गत नियम-1989 के तहत ही यह पत्र जारी किया जाता है।

एनएससी के कई फायदे हैं। यह 100, 500, 1000 और 10,000 मूल्यवर्ग में उपलब्ध है। यानी, इसमें 100 रुपये के साथ भी निवेश किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसमें निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, पर सालाना टैक्स छूट एक लाख रुपये तक ही मिल सकती है। इसमें आठ फीसदी की दर से प्रतिवर्ष ब्याज देने का भी प्रावधान है। साथ ही नाममात्र की फीस पर इसे किसी भी व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है। तीन वर्ष पूरा होने पर इसे बंद भी किया जा सकता है।

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