आपका शहर Close

गिरते रुपये को थामने की जरूरत

Mrinal Pandey

Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
Need to shore up falling Rupee
इन दिनों रुपया लगातार गिरता जा रहा है। माना जा रहा है कि यूरोप के आर्थिक संकट के चलते इसमें गिरावट आ रही है। रुपये को कमजोर करने में बढ़ते आयात बिल का भी बड़ा हाथ है। इस साल परिपक्व हो रहे 20 अरब डॉलर के विदेशी ऋण की अदायगी भी रुपये पर दबाव बना रही है। विनिमय दर में भारी उथल-पुथल से बचाने के लिए केंद्रीय बैंक हालांकि महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। लेकिन हाल ही में विदेशी मुद्रा बाजार में हुई उथल-पुथल पर रिजर्व बैंक ने हाथ डालने से परहेज ही किया है। रिजर्व बैंक का कहना है कि उसके हस्तक्षेप से फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है।
देश की मुद्रा का कमजोर होना निर्यातकों के लिए तो वरदान है, क्योंकि उनके लाभ काफी बढ़ जाते हैं, लेकिन महंगाई से पिसती जनता की मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। रुपये के कमजोर होने का मतलब है, प्रत्येक डॉलर के लिए ज्यादा रुपये देना। यानी पिछले एक वर्ष में रुपये के मूल्य में करीब 25 प्रतिशत की जो कमी आई है, उस कारण देश को 60 से 65 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त देने होंगे। जाहिर है, इससे हमारा व्यापार घाटा और बढ़ जाएगा। यही नहीं, पेट्रोलियम कंपनियां भी पेट्रो उत्पादों की कीमतें बढ़ा देंगी। नतीजतन पहले से महंगाई की मार झेलते आम आदमी को और पिसने के लिए तैयार रहना होगा। रुपया कमजोर होने से आयातित उपभोक्ता वस्तुएं तो महंगी होंगी ही, उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल और धातुएं आदि भी महंगी हो जाएंगी। ताजा आंकड़े के मुताबिक, महंगाई की मार झेलता औद्योगिक क्षेत्र लगातार गिरावट की ओर है। अप्रैल, 2010 में औद्योगिक उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 14.5 प्रतिशत थी, जो जनवरी 2012 तक घटकर 1.1 फीसदी रह गई।

यह विरोधाभास ही है कि उधर यूरोप की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, इधर हमारा रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। अल्पकाल में ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि अपने पैसे की सुरक्षा के मद्देनजर विदेशी संस्थागत निवेशकों को अमेरिकी सरकार के बांड अधिक सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं। लेकिन केवल यही कारण नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और सोने-चांदी का आयात बढ़ने की वजह से पिछले कुछ समय से हमारा आयात बिल भी अचानक बढ़ गया है।

कई बार कहा जाता है कि रुपये का अवमूल्यन होने से निर्यात बढ़ाकर आयात में कमी की जा सकती है। लेकिन हमारा अनुभव बताता है कि रुपया कमजोर होने पर भी आयात नहीं घटाया जा सकता। रुपये का अवमूल्यन कर निर्यात बढ़ाने की संभावना भी बहुत कम है। इसलिए रुपये का कमजोर होना देश के लिए अहितकारी है, क्योंकि इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है। दूसरी ओर, रुपया मजबूत होने पर ही महंगाई पर काबू पाया जा सकता है।

गिरते रुपये को थामने के लिए जरूरी है कि नीति निर्माता रुपये की कमजोरी का सही कारण समझें। चीन से बढ़ते आयात भी हमारे व्यापार घाटे में खासी वृद्धि कर रहे हैं। चीन से होने वाले व्यापार का घाटा कुल घाटे का 20 प्रतिशत से भी अधिक है। चीन से बढ़ता आयात हमारे रुपये को ही कमजोर नहीं कर रहा, हमारे उद्योगों के विकास को भी बाधित कर रहा है। ऐसे में सरकार और रिजर्व बैंक, दोनों अपने पास सीमित विकल्प की बात कर रहे हैं। जबकि सरकार का दायित्व बनता है कि वह कमजोर होते रुपये की चुनौती के मद्देनजर कुछ ठोस कदम उठाए।

इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले आयातों, खास तौर पर चीन से बढ़ते आयात पर रोक लगनी चाहिए। शुल्क बढ़ाकर और स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपायों के आधार पर भी इन आयातों को रोका जा सकता है। बढ़ते तेल बिल के मद्देनजर सरकार को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के प्रोत्साहन के लिए दीर्घकालीन उपाय करने होंगे। इसी तरह विदेशी संस्थागत निवेशकों के लाभों पर टैक्स लगाया जाए और उनके द्वारा लाए गए निवेशों पर न्यूनतम तीन साल की लॉक-इन शर्त लगाई जाए। गिरते रुपये को थामने के लिए सरकार को सक्रिय तो होना ही पड़ेगा। क्या हमारी सरकार इसके लिए तैयार है?
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

कंडोम कंपनी ने विराट-अनुष्का के लिए भेजा खास मैसेज, जानकर शर्मा जाएंगे नए नवेले दूल्हा-दुल्हन

  • बुधवार, 13 दिसंबर 2017
  • +

विराट-अनुष्का की शादी में हो गई जमकर लड़ाई, आपस में भिड़े डिजाइनर और फोटोग्राफर

  • बुधवार, 13 दिसंबर 2017
  • +

विराट-अनुष्का की शादी में एक मेहमान का खर्च था 1 करोड़, पूरी शादी का खर्च सुन दिमाग हिल जाएगा

  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

OMG: विराट ने अनुष्का को पहनाई 1 करोड़ की अंगूठी, 3 महीने तक दुनिया के हर कोने में ढूंढा

  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

मांग में सिंदूर, हाथ में चूड़ा पहने अनुष्का की पहली तस्वीर आई सामने, देखें UNSEEN PHOTO और VIDEO

  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

Most Read

क्या अब नेपाल में स्थिरता आएगी?

Will there be stability in Nepal now
  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +

राहुल के लिए पहाड़ जैसी चुनौतियां

Challenges like mountain for Rahul
  • रविवार, 10 दिसंबर 2017
  • +

कट्टरता के आगे समर्पण

 bowed down to radicalism
  • शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017
  • +

आसान नहीं राहुल की राह

Not easy way for Rahul
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

नेट की आजादी का सवाल

Net Freedom Question
  • गुरुवार, 7 दिसंबर 2017
  • +

तुष्टिकरण के विरुद्ध

Against apeasement
  • मंगलवार, 12 दिसंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!