विज्ञापन
विज्ञापन

चाहबहार बंदरगाह

Vinit Narain Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
भारत, अफगानिस्तान एवं ईरान की सरकार ने आवागमन सुविधाओं और व्यापार निवेश में वृद्धि करने के उद्देश्य से ईरान के चाहबहार बंदरगाह के विकास के लिए एक संयुक्त कार्यसमिति बनाने का फैसला किया है। दक्षिण पूर्वी ईरान में स्थित यह बंदरगाह हमारे लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान से बाहर-बाहर हमें अफगानिस्तान पहुंचने का एक वैकल्पिक रास्ता देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बंदरगाह के जरिये भारत न केवल अफगानिस्तान, बल्कि मध्य एशियाई देशों में भी अपनी पहुंच बना सकता है। ईरान इसे मुक्त व्यापार एवं औद्योगिक क्षेत्र के रूप में देख रहा है। हिंद महासागर और ओमान सागर की सीमा पर यह ईरान का अकेला ऐसा बंदरगाह है, जिसकी समुद्र तक सीधी पहुंच है।

चाहबहार पोर्ट का मास्टर प्लान 1973 में तैयार किया गया था, लेकिन इसलामिक क्रांति के बाद वित्तीय संकटों के कारण इस योजना में देरी हो गई। हालांकि इसके एक हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। चाहबहार बंदरगाह का कार्यकारी ऑपरेशन 1981 में शुरू किया गया और चार घाटों (जेटी) के पूरा होने के बाद 1983 में यह चालू हो गया। ईरान एवं इराक के युद्ध के दौरान ईरानी सरकार ने महसूस किया कि हरमूज जलडमरूमध्य एवं फारस की खाड़ी की तरह आयात-निर्यात में चाहबहार बंदरगाह की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

ईरान इसकी मौजूदा तीस लाख टन की क्षमता को बढ़ाकर एक करोड़ टन करना चाहता है। चाहबहार बंदरगाह से अफगान सीमा जरांज तक ईरान ने सड़क निर्माण किया है और जरांज से अफगानिस्तान के भीतर भारत ने डेलाराम तक 218 किलोमीटर का राजमार्ग बनाकर अफगानिस्तान को सौंप दिया है।

Recommended

UP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।
UP Board 2019

UP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।

हनुमान जयंती पर नौकरी प्राप्ति, आर्थिक उन्नत्ति, राजनीतिक सफलता एवं शत्रुनाशक हनुमंत अनुष्ठान
ज्योतिष समाधान

हनुमान जयंती पर नौकरी प्राप्ति, आर्थिक उन्नत्ति, राजनीतिक सफलता एवं शत्रुनाशक हनुमंत अनुष्ठान

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Opinion

कृषि क्षेत्र से ही पैदा होगा रोजगार

हमारे यहां के अर्थशास्त्री अब भी ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों के शहरी इलाकों में जाने को अच्छा मानते हैं, जबकि चीन ने शहरों से गांव जाने को प्राथमिकता में रखा है। भारत में अकेले कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकता है।

18 अप्रैल 2019

विज्ञापन

19 अप्रैल @ 9AM: 2 मिनट में सुनें हर खबर का अपडेट

अमर उजाला डॉट कॉम पर देश-दुनिया की राजनीति, खेल, क्राइम, सिनेमा, फैशन और धर्म से जुड़ी खबरें। सुनें दिनभर की खबरों का हर अपडेट 2 मिनट में।

19 अप्रैल 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election