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आईबीबीवाई

Vinit Narain

Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
इंटरनेशनल बोर्ड ऑन बुक्स फॉर यंग पीपुल (आईबीबीवाई) नामक एक अंतरराष्ट्रीय बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कार से इस बार तीन भारतीय (लेखक रंजीत लाल, व्याख्याता शांति देवी और अनुवादक निर्मल कांति भट्टाचारजी) सम्मानित किए गए हैं। इस पुरस्कार को बाल साहित्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ माना जाता है।
आईबीबीवाई एक गैर-सरकारी संस्था है, जिसकी स्थापना 1953 में स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में हुई। इसके गठन को लेकर प्रयास हालांकि 1952 में ही शुरू हो गया था, जब जैला लेपमैन नाम की एक महिला ने जर्मनी के म्यूनिख में इंटरनेशनल अंडरस्टैंडिंग थ्रू चिल्ड्रेंस बुक्स नामक एक सेमिनार का आयोजन किया। उस सेमिनार में महत्वपूर्ण प्रकाशक के साथ ही कई लेखक और बुद्धिजीवी भी शामिल हुए थे। उसी बैठक में आईबीबीवाई को मूर्त रूप देने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया, और ठीक एक वर्ष बाद आईबीबीवाई को गैर सरकारी संस्था के रूप में निबंधित कर दिया गया।


आईबीबीवाई कई उद्देश्यों के तहत काम करता है। पुस्तकों के माध्यम से बच्चों में अंतरराष्ट्रीय समझ विकसित करने के साथ ही यह पूरी दुनिया, खासकर विकासशील देशों में बच्चों की बेहतर किताब के प्रकाशन और वितरण को प्रोत्साहित करता है। बाल साहित्य को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन यह करता ही है, शोधपरक कार्यों के साथ-साथ बच्चों तक गुणवत्ता युक्त साहित्य की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में भी यह अनवरत काम कर रहा है। जैला लेपमैन, हंस क्रिश्चियन एंडरसन जैसे कई पुरस्कारों से बाल साहित्य को बढ़ावा दे रही यह संस्था 70 से अधिक देशों में काम कर रही है।
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