भगवान बुद्ध की करुणा भावना

Vinit Narain Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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भारतीय तटरक्षक बल का नया पोत 'समुद्र पहरेदार' चेन्नई बंदरगाह पर पहुंच गया है। यह स्वदेश निर्मित प्रदूषण नियंत्रक पोत है, जिसकी लंबाई 90 मीटर है। यह केवल समुद्र में फैले तेल को दूर करने में ही सक्षम नहीं है, बल्कि इसमें अग्निशमन उपकरणों के साथ-साथ किसी भी आपदा से निपटने के लिए उपकरण लगे हुए हैं। इसके अलावा, इसमें चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की गई है। इस पर चेतक हेलिकॉप्टर तैनात किया गया है, ताकि बचाव कार्य के अलावा यह समुद्र में गश्त भी लगाता रहे।
हमारे देश में सत्तर फीसदी से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी होती है। इसलिए समुद्र के रास्ते कच्चे तेल के टैंकर का परिवहन काफी होता है और तेल के रिसाव की आशंका बनी रहती है। इससे समुद्री प्रदूषण का खतरा रहता है। इस लिहाज से इस जहाज में लगे सबसे उन्नत एवं परिष्कृत प्रदूषण नियंत्रक उपकरण समुद्री प्रदूषण को रोकने में सक्षम हैं।

यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बना अपनी तरह का पहला प्रदूषण नियंत्रक पोत है। इसका निर्माण दक्षिण गुजरात के मगदल्ला स्थित एबीजी शिपयार्ड कंपनी ने किया है। यह तीन पोतों की शृंखला का दूसरा पोत है। इससे पहले 'समुद्र प्रहरी' का निर्माण किया गया और इस सीरीज का तीसरा पोत 'समुद्र पावक' अभी निर्माणाधीन है।

समुद्र पहरेदार को पूर्वी क्षेत्र के तटरक्षक बेड़े के साथ तैनात किया जाएगा। यह पोत निर्बाध रूप से 500 किलो लीटर तेल के भंडारण में सक्षम है। इसकी अधिकतम गति 20. 5 नॉट है और यह जहाज समुद्र में 6,500 किलोमीटर तक लगातार सफर करने में सक्षम है। सुखद है कि एक बार ईंधन डाल देने के बाद यह लगातार 20 दिनों तक समुद्र में सफर कर सकता है।

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