आपका शहर Close

क्या करें बेचारे शिक्षक

Vinit Narain

Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
हालांकि यह विरले ही होता है, लेकिन पिछले हफ्ते अमेरिकी शिक्षक संघ की सशक्त अध्यक्ष रैंडी वेनगॉर्टेन छुट्टी पर थीं। हालांकि ट्वीटर और हताशा का छुट्टी से कोई सरोकार नहीं होता। अकसर महसूस होता है कि ट्वीटर एक राष्ट्रीय ब्लैकबोर्ड की भांति है, जिस पर पुरुष और महिलाएं लगातार धावा बोलते रहते हैं। इस दौरान उनका भी ट्वीटर अकाउंट लगातार सक्रिय रहा, जिस पर उन्होंने जल्द प्रदर्शित होने वाले हॉलीवुड फिल्म वोंट बैक डाउन को लेकर तूफान मचा दिया।
अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'क्या यह फिल्म शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर, उन्हें बदनाम नहीं करती?' एक अन्य ट्वीट में वह लिखती हैं कि इस फिल्म में लगा पैसा एक ऐसे व्यक्ति की जेब से आया है, जो स्कूलों के निजीकरण का पक्षधर है।

अच्छाई और बुराई की लड़ाई के फॉरमूले पर आधारित यह फिल्म एक ऐसी बेसहारा मां की कहानी है, जिसका किरदार मैगी जिलेन्हाल ने निभाया है और जो एक बदहाल सरकारी स्कूल को, जिसमें उसकी बेटी पढ़ती है, स्थानीय अफसरों के चंगुल से छुड़ाने का बीड़ा उठाती है। इस फिल्म में कुछ शिक्षकों को ऐसे भावुक परोपकारी के रूप में दर्शाया गया है, जो अभिभावकों की ही तरह शिक्षा तंत्र की नाकामियों और अपने लापरवाह सहकर्मियों से क्षुब्ध हैं। लेकिन वेनगॉर्टेन का दर्द समझा जा सकता है।

यह समझने की जरूरत है कि हमारे बच्चों की शिक्षा से बढ़कर कुछ नहीं है और जब तक विभिन्न पक्ष अपने संकीर्ण हितों को लेकर आपस में ही झगड़ते रहेंगे, लोक शिक्षा उस स्तर तक नहीं पहुंच पाएगी, जहां हम इसे पहुंचाना चाहते हैं या जहां इसे होना चाहिए।

मैं अपने आसपास ऐसे अभिभावकों को देखता हूं, जो अपने बच्चों के लिए सरकारी के बजाय निजी शिक्षा को तरजीह देते हैं और अपने बच्चों को हर संभव सुविधा देने के लिए अपने बैंक खाते खंगाल डालते हैं। लेकिन ज्यादातर परिवार इतने खुशनसीब नहीं होते। देश में आज भी लगभग नब्बे प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते हैं, जो सामाजिक गतिशीलता के हमारे सबसे अच्छे इंजन, वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के लिए हमारे सबसे अच्छे दांव और हमारे देश के भविष्य की कुंजी साबित हुए हैं। लेकिन हाल के समय में उनकी दशा हतोत्साहित करने वाली है।

शायद सबसे बड़ा झटका शिक्षक संघों और डेमोक्रेट्स के रिश्तों में आई कड़वाहट से लगता है। राष्ट्रपति बराक ओबामा का शिक्षा मंत्री के तौर पर आर्ने डंकन को नियुक्त करना और उसके बाद प्रशासनिक अमले में उच्च पदों को पाने की होड़, शिक्षक संघों को फूटी आंख नहीं सुहाई है। जून में हुए मेयरों के एक सम्मेलन में अभिभावकों से संबंधित जिस विवादास्पद विधेयक (पेरेंट ट्रिगर लेजिस्लेशन) पर डेमोक्रेटिक मेयरों ने एकमत से रिपब्लिकन मेयरों के सुर में सुर मिलाए थे, उस पर शिक्षक संघों को घोर ऐतराज है।

हाल ही में कुछ राज्यों में इसे पारित कर दिया गया है और दूसरे राज्य इस पर विचार कर रहे हैं। इसमें ऐसे प्रावधान हैं, जो अभिभावकों को खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को अपने नियंत्रण में लेने के लिए उकसाते हैं, ताकि उन्हें निजी संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों में बदला जा सके। हालांकि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, इसलिए यह कोई नहीं कह सकता कि ‘पेरेंट ट्रिगर लेजिस्लेशन’ के भावी परिणाम क्या होंगे।

लॉस एंजिलिस के मेयर एंटोनियो विलाराई गोसा ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा है, 'यह अभिभावकों को एक अतिरिक्त औजार प्रदान करता है।' वह मानते हैं कि नए दृष्टिकोण जरूरी हैं और शिक्षक संघ क्षतिग्रस्त तंत्र के सबसे बड़े पैरोकार हैं। मजे की बात यह है कि ये विचार उस राजनेता के हैं, जो अपने करियर के शुरुआती दिनों में शिक्षकों के संघ का समर्थक था।

वह कहते हैं कि ज्यादातर शिक्षकों को नायक समझते हुए वह शिक्षण के पेशे को पूजनीय मानते थे और संघों का भी समर्थन करते थे, लेकिन नियुक्ति, पदोन्नति और निलंबन के सभी निर्णयों का आधार प्रदर्शन या योग्यता के बजाय वरिष्ठता होना, बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'यह वैसा ही होगा कि मैं तीसरी बार चुनाव लड़ते हुए कहूं, मुझे वोट दीजिए, क्योंकि मैं यहां सबसे लंबे समय से हूं।'

वेनगॉर्टेन स्वीकारती हैं कि इस हालात के लिए काफी हद तक शिक्षक संघ ही जिम्मेदार हैं। क्लेरमोंट ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी में शिक्षा के प्रोफेसर चार्ल्स टेलर कर्चनर कहते हैं, 'निजी क्षेत्र में किसी को, किसी भी तरह की सुरक्षा हासिल नहीं होती।' इसलिए वेतनवृद्धि और पेंशन पर होने वाली रोजमर्रा की वार्ता में संघों की हालत नांद में लड़ते हुए सुअरों जैसी होती है।

योग्य शिक्षक समय की मांग हैं, क्योंकि आज हमारे पास जो शिक्षक उपलब्ध हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शिक्षा इतिहासकार डियान रैविच कहते हैं, 'यह नैतिक पतन का ऐतिहासिक बिंदु है।' हमें इससे निकलने का रास्ता तलाशना होगा। डेमोक्रेट्स फॉर एजुकेशन रिफॉर्म के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जोए विलियम्स कहते हैं, 'हमारे सबसे अच्छे शिक्षकों के साथ जैसा व्यवहार हो रहा है, उससे बेहतर होना चाहिए। लेकिन इसके लिए हमें साफ तौर पर यह कहने की हिम्मत जुटानी होगी कि कुछ शिक्षक दूसरों से कहीं ज्यादा योग्य होते हैं।' वोंट बैक डाउन फिल्म मुझे यही संदेश देती लगती है। हालांकि फिल्म की एक सीमा भी है।
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

बचपन से एक दूसरे को जानते हैं विराट-अनुष्का, ऐसे हुई थी इनकी पहली मुलाकात

  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

Bigg Boss 11: विकास ने अर्शी के साथ मिलकर रची साजिश, मास्टर माइंड के प्लान से नॉमिनेट हुए ये सदस्य

  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

PHOTOS: ‌बिन बताए विराट-अनुष्का ने कर ली शादी, यहां जानें कब-क्या हुआ?

  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

शादीशुदा हीरो पर डोरे डाल रही थी ये एक्ट्रेस, पत्नी ने सेट पर सबके सामने मारा चांटा

  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

सर्दियों में ट्रेडिंग है ओवरकोट, हर ड्रेस के साथ इन सेलिब्रिटीज की तरह कर सकते हैं मैच

  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

Most Read

क्या अब नेपाल में स्थिरता आएगी

Will there be stability in Nepal now
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

आसान नहीं राहुल की राह

Not easy way for Rahul
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

राहुल के लिए पहाड़ जैसी चुनौतियां

Challenges like mountain for Rahul
  • रविवार, 10 दिसंबर 2017
  • +

पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र

Internal democracy in parties
  • सोमवार, 11 दिसंबर 2017
  • +

कट्टरता के आगे समर्पण

 bowed down to radicalism
  • शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017
  • +

अंतहीन कृषि संकट से कैसे उबरें

How to recover from endless agricultural crisis
  • मंगलवार, 5 दिसंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!