सेनकाकू द्वीप समूह

Vinit Narain Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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जापान के एक राष्ट्रवादी समूह गैंबर निप्पॉन द्वारा सेनकाकू नामक विवादित द्वीप पर जापानी झंडा फहराने को लेकर चीन एवं जापान के संबंधों में तल्खी देखी जा रही है। इससे कुछ ही समय पूर्व चीन के 14 लोगों के एक समूह ने जापान के तटीय सुरक्षा कर्मचारियों को चकमा देकर इस द्वीप पर चीनी झंडा फहरा दिया था।
सेनकाकू एक निर्जन द्वीप समूह है, जो पूर्वी चीन सागर में स्थित है। यह द्वीप समूह वर्षों से जापान के प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन चीन इस पर अपना दावा जताता रहा है। चीन का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध से पहले यह द्वीप समूह चीन के कब्जे में था, इसलिए वह कभी इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि यह जापान का क्षेत्र है।

दरअसल द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1945 में अमेरिका ने जापान के दो नगरों, हिरोशिमा और नागाशाकी पर परमाणु बम गिराकर उसे घुटने टेकने को मजबूर कर दिया और यह द्वीप अपने कब्जे में ले लिया था। 15 मई, 1972 तक यह द्वीप समूह अमेरिका के कब्जे में रहा। और जब उसने इस पर अपना दावा छोड़ा, तो 20 मई, 1972 को चीन और जापान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में इस द्वीप पर अपनी संप्रभुता को लेकर दावा जता दिया। उधर तइवान भी इस द्वीप समूह पर अपना दावा जता रहा है।

जापान सेनकाकू द्वीप समूह को 'सेनकाकू' कहकर पुकारता है, तो चीन उसे 'दियाओउ' द्वीप समूह कहता है। इस द्वीप समूह में पांच निर्जन द्वीप और तीन बंजर पठार हैं, जिनका क्षेत्रफल 800 वर्ग मीटर से लेकर 4.32 वर्ग किलोमीटर तक है। असल में, इस द्वीप समूह को लेकर विवाद का मुख्य कारण इस क्षेत्र के समुद्र में प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है, जिस पर दोनों देशों की नजर है।

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