चुनौतियों से खेलने वाला शख्स

Vinit Narain Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
द न्यूयॉर्क टाइम्स, द इंटरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून और द बोस्टन ग्लोबल जैसे अखबारों की स्वामित्व कंपनी द न्यूयॉर्क टाइम्स इन दिनों पाठकों की बदलती आदतों और विज्ञापन बाजार के रुझान में हो रहे परिवर्तन से जूझ रही है। इसी वजह से इस वर्ष की दूसरी तिमाही में उसे 8.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान भी हुआ है। बावजूद इसके उसे विश्वास है कि नवंबर में कार्यभार संभालने वाला उसका नया सीईओ कंपनी को इन सारी दुश्वारियों से बाहर निकाल लाएगा। आखिर इस नवनियुक्त सीईओ ने बीबीसी को भी तो डिजिटल कर उसे कई समस्याओं से उबारा है!

द टाइम्स के अध्यक्ष आर्थर सर्ल्जबर्गर जूनियर की मानें, तो यह शख्स गॉड 'गिफ्टेड एग्जीक्यूटिव', यानी ईश्वरप्रदत्त कार्यकारी अधिकारी है। आखिर यह हस्ती है कौन? यह शख्स और कोई नहीं, बीबीसी के महानिदेशक मार्क थॉम्पसन हैं, जिनकी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2009 में फोर्ब्स ने दुनिया की सबसे ताकतवर शख्सियत में उन्हें 65वें स्थान पर रखा था।

मार्क थॉम्पसन को गॉड गिफ्टेज एग्जीक्यूटिव बताने की कई वजहें हैं। वर्ष 2004 में जब उन्होंने बीबीसी के महानिदेशक का पद संभाला था, तब बीबीसी तकनीकी अक्षमता के साथ ही कई अन्य चुनौतियों से जूझ रही थी। पर जल्दी ही यह संस्था न सिर्फ डिजिटल हो गई, बल्कि चुस्त और रचनात्मक प्रसारक का रुतबा भी उसने दोबारा हासिल कर लिया। आज स्थिति यह है कि बीबीसी आईप्लेयर पर बीबीसी के लाइव कार्यक्रम के साथ ही पिछले हफ्ते के कार्यक्रम भी देखे जा सकते हैं।

हालांकि मार्क की राह में कई मुश्किलें भी आईं। कार्यक्रम की गुणवत्ता पर सवाल तो उठाए ही गए, इस्राइल समर्थक होने और ईशनिंदा के आरोप भी उन पर लगे। पर इतने विवादों के बाद भी मार्क सफल एग्जीक्यूटिव माने गए, आखिर क्यों? मार्क की ही मानें, तो उन्होंने अपने काम का खूब आनंद उठाया और जब आप ईमानदारी से अपना काम करते हैं, तो आलोचकों के पास चुप्पी साधने के अलावा कुछ बचता नहीं है।

स्मॉल आइलैंड, पैनोरमा जैसे कार्यक्रमों को पसंद करने वाले मार्क एक बार फिर नई चुनौती का सामना करने जा रहे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि 'गैर पारंपरिक समाचार उत्पाद को विकसित करने की अपनी क्षमता' के बल पर वह द न्यूयॉर्क टाइम्स को किस ऊंचाई तक ले जाएंगे।

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