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अमेजन बांध

Vinit Narain Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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ब्राजील की एक अदालत ने अमेजन क्षेत्र में पनबिजली परियोजना के लिए निर्माणाधीन विशाल बांध के निर्माण पर रोक लगा दी है। इस विशाल बांध का स्थानीय भारतीय लोग, मछुआरे एवं पर्यावरण प्रेमी विरोध कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ब्राजील में प्रवासी भारतवंशियों की एक छोटी-सी आबादी रहती है, जिनकी संख्या करीब 2,000 के आसपास है।
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हाल के दशकों में तेजी से आर्थिक विकास के कारण ब्राजील में ऊर्जा जरूरत बढ़ गई है। वहां की सरकार ने 2005 में देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिहाज से अमेजन क्षेत्र में झिंगू नदी पर एक विशाल पनबिजली परियोजना को मंजूरी दी थी। जब इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी, तो कहा गया था कि निर्माण कार्य से पहले पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

शुरू से ही स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण बांध का निर्माण कार्य देरी से मार्च, 2011 में शुरू हुआ था। माना जाता है कि अगर यह बांध बनकर तैयार हो गया, तो यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना होगी। इस बांध के निर्माण के लिए कुल 10.6 अरब डॉलर की जरूरत होगी और इसके 2019 में तैयार होने की संभावना जताई गई थी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस बांध से 503 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र डूब जाएगा और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 66 समुदाय प्रभावित होंगे। हालांकि सरकार इससे इनकार करती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे 16,000 लोग प्रभावित होंगे, जबकि स्वयंसेवी संगठन 40,000 लोगों के विस्थापित होने की आशंका जता रहे हैं। इस परियोजना से 11,000 मेगावाट बिजली तैयार होने की संभावना है।

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