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यूनान के संकटमोचक

Vinit Narain Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
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1970 के दशक में यूनान का प्रसिद्ध एथेंस कॉलेज अपने शैक्षणिक क्रियाकलापों के साथ ही एक अनूठे विरोध के लिए भी खूब प्रसिद्ध हुआ। वह विरोध तत्कालीन जुंटा की सैन्य सरकार के प्रतिबंधों के खिलाफ शुरू हुआ था, जिसमें दो छात्रों ने अपनी दाढ़ी बढ़ानी शुरू कर दी। उन दिनों को याद करते हुए एथेंस कॉलेज के ही पूर्व छात्र फिलिप सियारस कहते हैं कि उस वक्त उन दोनों को देखकर यह अंतर करना मुश्किल होता था कि वे मानव हैं, या फिर घने बालों वाले कोई शाही जानवर।
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तब शायद ही लोगों ने यह सोचा होगा कि साथ-साथ विरोध करने वाले और एक ही छात्रावास में रहने वाले वे दोनों युवक आगे चलकर देश के मुखिया भी बनेंगे। उनमें से एक यूनान के पूर्व सोशलिस्ट प्रधानमंत्री जॉर्ज पापेंद्रू थे, जबकि दूसरे शख्स का नाम एनटोनिस समारस था, जिन्हें पिछले दिनों यूनान का प्रधानमंत्री घोषित किया गया है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख समारस को हालांकि पूर्ण बहुमत नहीं मिला सका, लेकिन सोशलिस्ट पार्टी पासोक और डेमोक्रेटिक लेफ्ट के साथ गठबंधन कर वह सरकार बनाने में कामयाब हुए हैं।

समारस की गिनती उदार अर्थशास्त्रियों में होती है। उन्हें ऐसे वक्त में देश की कमान मिली है, जब यूनान कर्ज संकट और दीवालिया होने के कगार पर है। चूंकि समारस कई सरकारों के कैबिनेट में भी रह चुके हैं और वामपंथी सीरीजा पार्टी की खर्चों में कमी करने की नीतियों की मुखालफत भी कर रहे हैं, इसलिए माना जा रहा है कि वह यूनान की अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर ले आएंगे। यही वजह है कि उनकी ताजपोशी का यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने स्वागत किया है।

समारस का राजनीतिक सफर महज 26 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो गया, जब पहली बार वह संसद में पहुंचे। हालांकि सियासत में उन्हें 1990 के दशक में पहचान मिली, जब बतौर विदेश मंत्री एकल मुद्रा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मास्त्रिक्ट समझौता किया, पर नए राज्य मैसेडोनिया के नाम और उसकी सीमा को लेकर वह पार्टी के खिलाफ हो गए। नतीजतन उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नई पार्टी का गठन किया। हालांकि बाद में उन्होंने इसका विलय फिर से न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी में कर दिया। आलोचकों की नजर में महत्वाकांक्षी अवसरवादी व्यक्ति माने जाने वाले समारस टेनिस के बेहतर खिलाड़ी भी रहे हैं और क्लब की पार्टियों में जाना उनका पसंदीदा शौक रहा है।

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