अनाज भंडारण की समस्या नहीं

Vinit Narain Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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खाद्यान्न की रिकॉर्ड पैदावार के बाद राज्य भी गेहूं की रिकॉर्ड खरीद कर रहे हैं। ऊंचे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और कुछ राज्यों में बोनस मिलने से किसानों की बिकवाली बढ़ी है। इस कारण ज्यादातर राज्यों में भंडारण की समस्या खड़ी हो गई है। भंडारण समस्या पर केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक आपूर्ति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के वी थॉमस से विजय गुप्ता ने बात की-
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रिकॉर्ड पैदावार को देखते हुए ज्यादातर राज्यों ने इस बार निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा खरीद की है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में अनाज का भारी स्टॉक हो गया है। इसे सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने क्या व्यवस्था की है?
केंद्र सरकार ने चालू सीजन में खरीदे गए अनाज को सुरक्षित रखने के लिए लगभग 172 लाख टन भंडारण की अतिरिक्त व्यवस्था की है। इसमें 152 लाख टन कवर्ड है और 20 लाख टन की क्षमता के साइलोज का निर्माण किया है। इसमें लगभग 12 लाख टन अनाज भंडारण की व्यवस्था पंजाब में की गई है।
अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित होने के बावजूद मंडियों में अनाज खुले में रखा हुआ है। राज्य लगातार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से अनाज उठाने का अनुरोध कर रहे हैं, क्योंकि इस महीने के अंत तक उत्तर भारत में मानसून सक्रिय होने की संभावना है। ऐसे में खुले में रखा अनाज कब तक सुरक्षित कर लिया जाएगा?
चालू खरीद सीजन के गेहूं को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है। पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में खुले में रखे गेहूं को उठाकर दूसरे राज्यों में शिफ्ट किया जा रहा है। जल्दी ही उत्तर प्रदेश से भी चालू सीजन में खरीदे गए गेहूं का मूवमेंट शुरू किया जाएगा। पंजाब और हरियाणा से गेहूं का उठाव लगभग दो गुना कर दिया गया है। पंजाब से प्रति माह चार लाख टन गेहूं का उठाव हो रहा है, जिसे बढ़ाकर आठ लाख टन किया जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर सरकार के सहयोगी दलों के बाद अब कृषि विशेषज्ञ भी सवाल खड़े कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में केंद्र के लिए खाद्य सुरक्षा कानून को सर्वसम्मति से लागू करना आसान नहीं लग रहा। ऐसे में क्या खाद्य सुरक्षा कानून के लिए गरीबों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है?
नहीं, ऐसा नहीं है। सहयोगी दलों की चिंताओं को दूर कर लिया गया है। रही बात कृषि विशेषज्ञों और जानकारों की, तो उनकी ओर से उठाए गए सवालों और सुझावों पर भी गौर किया जा रहा है। हालांकि इन दिनों खाद्य सुरक्षा विधेयक पर संसद की स्थायी समिति विचार कर रही है। समिति ने विधेयक पर विचार के लिए तीन महीने का समय और मांगा है, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी दे दी है। पहले स्थायी समिति को खाद्य सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट अप्रैल में देनी थी। अब यह रिपोर्ट जुलाई के अंत तक आने की संभावना है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि संसद के मानसून सत्र में स्थायी समिति की रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद ही आगे की स्थिति साफ हो सकेगी।

सहयोगी दलों और विशेषज्ञों की चिंताएं मौजूदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लचर ढांचे को लेकर हैं। पीडीएस के आधुनिकीकरण में कितनी प्रगति हुई है, क्योंकि इसके बगैर खाद्य सुरक्षा कानून का लाभ वास्तविक लोगों तक पहुंचना मुश्किल है?
पीडीएस के आधुनिकीकरण का काम प्रगति पर है। दिल्ली सहित आठ राज्यों में राशन कार्ड का डिजिटलाइजेशन और लाभार्थियों के डाटाबेस का काम पूरा हो गया है। जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात सहित दस राज्यों में यह काम चल रहा है। इस काम के चलते अब तक 248.05 लाख राशन कार्ड बोगस पाए गए हैं। इन्हें रद्द किए जाने से अब तक केंद्र सरकार को 9,500 करोड़ की सबसिडी की बचत हुई है।
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