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सैंडविच

Vinit Narain Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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इन दिनों ब्रिटेन के सैंडविच नगर में दुनिया भर में प्रसिद्ध खाद्य पदार्थ सैंडविच की ढाई सौवीं सालगिरह धूमधाम से मनाई जा रही है। सैंडविच शब्द का लिखित दस्तावेज वर्ष 1762 का मिलता है। ब्रिटिश सैंडविच एसोसिएशन के मुताबिक, कुलीन अंगरेज परिवार के चौथे अर्ल ऑफ सैंडविच जॉन मॉनटागू (1718-1792) के नाम पर इसका नाम रखा गया है, जो न तो इसके आविष्कारक थे और न ही बनाने वाले। दरअसल एक बार वह अपने दोस्तों के साथ ताश खेलने में इतने मशगूल थे कि खेलते-खेलते ही नौकर से दो स्लाइस ब्रेड के बीच मांस डालकर लाने के लिए कहा, ताकि उसे खाने के लिए दूसरे हाथ का इस्तेमाल न करना पड़े।
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हालांकि नवपाषाण काल से ही रोटी के बीच मांस या सब्जियां डालकर खाने की परंपरा रही है, जैसे प्राचीन यहूदी संत हीलेल (वरिष्ठ) ने मिस्र से यहूदियों के प्रस्थान के समय दो रोटियों के बीच सलाद और जड़ी-बूटी के पत्ते डालकर खाया था, जो यहूदियों में एक परंपरा बन गई है। जो भी हो, पर सैंडविच का नाम जॉन मॉनटागू के नाम पर ही रखा गया है। हालांकि ब्रिटेन में सैंडविच नाम का एक बंदरगाह भी है।

सैंडविच की लोकप्रियता इंग्लैंड और स्पेन में तब बढ़ी, जब 19वीं सदी में औद्योगिक समाज का उत्थान हुआ और श्रमिक वर्ग ने इसे सुविधाजनक खाद्य के रूप में स्वीकार किया। उसी समय अमेरिका में इसे शुरू में रात के भोजन के रूप में स्वीकार किया गया। ब्रिटिश शासन के दौरान ही हमारे देश में भी इसका प्रचलन शुरू हुआ, जिसे डबल रोटी कहा जाता था। दुनिया भर में लोकप्रिय सैंडविच आज इतने भिन्न व बड़े आकारों में बनने लगा है कि इसके आविष्कार का मकसद ही खत्म हो गया है।

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