विज्ञापन

अब रामखिलावन भी अनार खाते हैं

Vinit Narain Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
अनार का नाम लेते ही बीमार की याद आ जाती। यह वह समय था, जब चवन्नी की औकात थी। दवा के नाम पर कुछेक रंग-बिरंगे काढ़े मिलते थे। एंटीबायोटिक की आमद नहीं हुई थी। ले-देकर एक अनार था। हर बीमारी का शर्तिया इलाज। अनार घर में तभी आता था, जब कोई बीमार पड़ जाता था। पर अब कोई अनार को दवा के रूप में नहीं खाता। नवधनाढ्य अनार का जूस शहर के मुख्य चौराहों पर खड़े होकर पीते हैं। इससे उन्हें दो फायदे होते हैं। एक तो सेहत सुधरने का आभास होता है, दूसरे गरीब जनता के सामने उनकी संपन्नता का प्रदर्शन हो जाता है।
विज्ञापन
कल तक अनार केवल अनार था। साल के ग्यारह महीनों में आम आदमी की पहुंच से बाहर। बस किसी एक महीने के चंद दिनों में वह इस भाव मिल जाता कि मध्यवर्ग के लोग एकाध अनार खरीद कर घर ले जाते, ताकि बच्चों की यह गलतफहमी दूर हो सके कि अनार केवल अ से अनार वाली किताब में ही नहीं, पेड़ों पर भी लगता है। फलों की ऊंची दुकान पर सलीके से सजाकर रखे अनार हर आते-जाते को चिढ़ाते कि जेब में दाम हों, तो आओ और खाओ। पर ये सब बीते कल की बाते हैं। खबर आई है कि अनार का सेवन आजन्म ब्रह्मचर्य के व्रतियों के शांत मनों को भी अशांत कर सकता है।

विदेश में हुए एक शोध ने अनार के गुणों को उजागर करके अनायास ही उसे सेलिब्रिटी स्टेट्स दे दिया है। पर इससे कुछ लोगों की परेशानी बढ़ने वाली है। कल तक रामखिलावन दफ्तर से घर लौटते हुए अपनी ऊपरी कमाई के कुछ हिस्से का सदुपयोग अनार खरीदने में करते थे। पर अब उन्होंने ऐसा किया, तो लोग कहेंगे, रामखिलावन भी उसी मर्ज के मरीज निकले। बड़ा सीना फुलाए घूमते थे खाली-पीली। पांडेजी की नई-नई शादी हुई है। पंडिताइन अनार खाने की जिद पकड़े है। अब पांडे जी क्या करें? सरेआम अनार खरीदने पर लोग उनकी अंदरूनी सेहत के संबंध में जाने क्या-क्या अटकलें लगा बैठें।

हमारे मुल्क में आबादी प्रकाश की गति से भी तीव्र वेग से बढ़ रही है। पर यहां के लोगों को लाज बहुत आती है। अनेक महारथी तो कैमिस्ट से गर्भ निरोधक खरीदने में ताउम्र संकोच करते रहे और उनके आंगन में नन्हे-मुन्नों की किलकारियां साल दर साल गूंजती रहीं। अब यह निर्लज्ज अनार आ गया है अपने नए अवतार में, जिसके वार से परिवार नियोजन संबंधी समस्त अभियान बेकार हो जाएंगे।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Opinion

आयुष्मान भारत बदल देगा तस्वीर

यह कुछ कुछ वैसा ही है, जिस तरह से यूपीए ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की शुरुआत की थी। पर वह गेम चेंजर लोकप्रिय सामाजिक योजना कई घोटालों में डूब गई।

25 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

अफगानिस्तान के खिलाफ धोनी ने संभाली टीम की कमान, देखिए वजह

अफगानिस्तान के खिलाफ एशिया कप में एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी ने टीम की कमान संभाली। देखिए क्या है इसके पीछे की वजह

25 सितंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree