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ओरिएंटल नाइसिटी

Vinit Narain Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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समुद्री जहाज ओरिएंटल नाइसिटी के भारतीय सीमा में प्रवेश पर सर्वोच्च न्यायालय ने प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा निर्देश इस जहाज से प्रदूषण फैलने की आशंका के मद्देनजर दिया गया है। इसे भारतीय मूल की ही एक कंपनी ने खरीदा है और चूंकि यह खराब हो चुका है, इसलिए इसे तोड़ने के लिए गुजरात के अलंग बंदरगाह की ओर भेजा जा रहा था। अतीत में इस जहाज को एक्सॉन वाल्डेज, एक्सॉन मेडिटेरियन और डांग फेंग ओसियन जैसे नामों से भी जाना जाता था।
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यह तेलवाहक जहाज 24 मार्च, 1989 को तब सुर्खियों में आया था, जब इसके अलास्का में दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की वजह से एक करोड़ गैलन से अधिक कच्चा तेल पानी में बह गया था। इस दुर्घटना से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा था। स्थिति यह थी कि अलास्का के दक्षिणी बंदरगाह प्रिंस विलियम साउंड का करीब 1,300 मील लंबा तट प्रदूषित हो गया था, जिससे हजारों पक्षियों और समुद्री जीवों की मौत हो गई थी।

यह दुर्घटना इतिहास की सबसे विनाशकारी मानव निर्मित पर्यावरणीय आपदा बताई जाती है। वैसे 2010 में मैक्सिको की खाड़ी में डीपवाटर होरिजन से पेट्रो उत्पाद निकलने की दुर्घटना भी बड़ी पर्यावरणीय आपदाओं में शीर्ष पर है, लेकिन इसका आधार तेल रिसाव है।

इस जहाज का टैंक 301 मीटर लंबा, 50 मीटर चौड़ा और 26 मीटर गहरा है, जबकि इसका वजन 30,000 टन से भी अधिक है। डीजल इंजन पर चलने वाला यह जहाज 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से भी ज्यादा तेज चलने और साढ़े दस लाख बेरल तेल ढोने में सक्षम है। इस जहाज को बनाने का श्रेय कैलिफॉर्निया की नेशनल स्टील ऐंड शीपबिल्डिंग कंपनी को जाता है।

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