सीबीआई, सरकार और ओल्गा

Vinit Narain Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
CBI government and Olga
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एक और सनसनीखेज मामला गलीचे के नीचे बुहार दिया जाने वाला है। ओल्गा कोझिरेवा तस्करी कांड के उजागर होने के बारह साल बाद वित्त सचिव आर एस गुजराल ने सीबीआई निदेशक ए पी सिंह को भारतीय कस्टम और केंद्रीय आबकारी विभाग के पांच अफसरों के खिलाफ दिल्ली की तीसहजारी स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में केस बंद करने की अर्जी लगाने को कहा है। सीबीआई का मुकदमा इन अधिकारियों के खिलाफ पिछले साल शुरू हुआ, जिसे वापस लिया जाना है।
यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब 28 अप्रैल, 2000 को 27 वर्षीय उज्बेक युवती ओल्गा कोझिरेवा को गिरफ्तार किया गया था। उसने अपने बयान में बताया था कि ताशकंद में 1992 में मेडिसिन में डिप्लोमा करने के बाद उसने रेडक्रॉस में नौकरी की, और उसके बाद उसने खुद का एक्सपोर्ट का धंधा शुरू कर दिया था। उसका पति खेलकूद शिक्षक था, जिसकी मामूली तनख्वाह में गुजर बसर मुश्किल थी। मगर सीबीआई के अधिकारियों का मानना है कि पैसे की हवस ने ओल्गा को तस्करी के धंधे में उतार दिया।

ओल्गा ने खुद ही स्वीकार किया था कि वह 1997 से लगातार भारत आ रही थी। अकसर वह दिल्ली आती, और फिर यहां से कराची या लाहौर रवाना हो जाती। उसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1.56 करोड़ रुपये मूल्य के 27 थैलों के साथ पकड़ा गया था।

वह दिल्ली के पहाड़गंज के अलग-अलग होटलों में ठहरती रही थी। यह वह दौर था, जब कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंटट स्टेट्स के देशों से हवाई जहाज से उतरने वाले यात्रियों में ऐसी औरतें होती थीं, जो अपने साथ ढेरों सामान लाती थीं और पहाड़गंज की तंग गलियों में खो जाती थीं। रूस और उज्बेकिस्तान से आने वाली इन औरतों में कॉलगर्ल्स भी होती थीं। ओल्गा ने अपना जाल किस तरह फैलाया होगा, इसका अंदाजा इस बात से पता चलता है कि अक्तूबर, 1999 से अगस्त, 2000 के बीच के दस महीनों में उसने 68 बार भारत की यात्रा की थी।

जांचकर्ताओं को शुबहा था कि ओल्गा कपड़ों के साथ मादक पदार्थ और हथियार भी लाती रही होगी। यह भी पता चला कि वह दो अफगान नागरिकों के साथ काम करती थी, जो हवाई अड्डे से बाहर ट्रकों में उसका इंतजार करते थे। सीबीआई का कहना है कि ओल्गा, कस्टम अधिकारी और वे दोनों अफगान एक गंदे त्रिभुज की तीन भुजाएं थे। किसी को नहीं मालूम कि उसे गिरफ्तार क्यों किया गया, जबकि अनेक कस्टम अधिकारी उसे पूरा सहयोग करते थे।

अब सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं हैं, यद्यपि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानतल पर कस्टम अधिकारियों की मिलीभगत से चीनी रेशम के 2001 तक कई वर्षों तक गुप्त आयात करने वाली उज्बेक औरतों और अफगान पुरुषों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण हैं। इस स्मगलिंग रैकेट का परदाफाश होने के बाद तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अनेकों एजेंसियों द्वारा जांच के आदेश दिए थे, जिनका अब कोई मतलब नहीं है।

ओल्गा कोझिरेवा के गिरोह ने एयरपोर्ट पर कीमती कपड़ों के हजारों थानों की कीमत बहुत कम बताई थी। समय-समय पर यह गिरोह खुद ही ये खेपें लाता था, कस्टम अधिकारी उन्हें कम कीमत की इन्वोइस और थैलों की संख्या में हेरफेर कर पास करवा देते थे। 2006 के बाद की विभागीय जांचों द्वारा दाखिल आरोपपत्र कहता है, ' कुछ उज्बेक नागरिकों द्वारा लाए गए एक छोटे थैले का वजन 75 किलो और बड़े थैले का वजन 150 किलो होता था। चूंकि कपड़ा अपेक्षाकृत हलकी चीज है, इसलिए इसका आयतन काफी अधिक होता है। अत: इन यात्रियों द्वारा लाई गई निषिद्ध वस्तुएं अलग हटकर दिखाई देतीं थीं। इस बात के मद्देनजर यह तो असंभव ही है कि व्यापारिक वस्तुओं की इतनी बड़ी मात्रा में तस्करी रोकथाम अधिकारियों की जानकारी के बिना होती होगी।'

यदि सीबीआई सुबूतों के अभाव में सरकार द्वारा मामले को न्यायालय से वापस लेने की सिफारिश मान लेती है, तो देश को झकझोर कर रख देने वाले इस मामले में किसी भी सरकारी अधिकारी को सजा नहीं होगी।

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