विज्ञापन

जब गांधी ने पूछा- अंग्रेज जब चले जाएंगे, तो क्या इतिहास से उन्हें मिटा देना संभव होगा?

रामचंद्र गुहा Updated Sun, 28 Jan 2018 03:09 PM IST
When Gandhi asked from KM Munshi, would it be possible to eradicate British completely from history
विज्ञापन
ख़बर सुनें
लेखक-राजनीतिक के एम मुंशी ने 1945 में महात्मा गांधी के पास अपने ऐतिहासिक उपन्यास पृथ्वीवल्लभ की एक प्रति भेजी। गांधी ने दिलचस्पी के साथ इसे पढ़ा, लेकिन वह कुछ उलझन में पड़ गए। उन्होंने मुंशी से कहाः एक इतिहासकार के रूप में आप क्या मुस्लिम इतिहास को पूरी तरह से भूल सकते हैं?
विज्ञापन
यदि ऐसा है, तो भी क्या आप सारे भारत को इसे भूलने के लिए राजी कर सकते हो? क्या आप पानी की धारा को उलटा कर सोच सकते हो कि वह आगे की ओर बहने लगे? अंग्रेज जब चले जाएंगे, तो क्या इतिहास से अंग्रेजों के संबंधों के कारण जो परिणाम हुए उन्हें पूरी तरह मिटा देना संभव होगा?

गांधी की यह टिप्पणी आज एकदम प्रासंगिक है, जब केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारें भारत पर मुस्लिमों और अंग्रेजों के प्रभाव से संबंधित हर निशान को मिटा देना चाहती हैं। वास्तव में वह एक कदम आगे जाकर स्वतंत्रता संग्राम के कुछ मुख्य किरदारों को बेदखल कर उनकी जगह हिंदुत्व के प्रतीकों (एम एस गोलवलकर और दीनदयाल उपाध्याय आदि) को स्थापित करना चाहती हैं, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में कोई भूमिका नहीं निभाई थी।

राष्ट्रीय आंदोलन की अन्य विभूतियों, मसलन अरबिंदो, नेहरू और राजाजी, की तुलना में गांधी उतने विद्वान नहीं थे। उनका अध्ययन व्यापक और गहन होने के बजाय अव्यवस्थित था। उन्होंने जो किताबें पढ़ी थीं, उनका रुझान इतिहास पर केंद्रित न होकर धार्मिक और नैतिक किस्म का था। हालांकि गांधी जी के लेखन में इतिहास लेखन के कुछ दिलचस्प अक्स भी मिलते हैं।

लिहाजा, 1909 में लिखी गई अपनी किताब हिंद स्वराज में गांधी ने आकलन किया कि इतिहासकारों ने अहिंसा के बजाय हिंसा पर कहीं अधिक ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने टिप्पणी की कि, 'सैकड़ों देश शांति के साथ रह रहे हैं, इतिहास न तो इस तथ्य को दर्ज कर सकता है और न ही न ही करेगा।'
विज्ञापन
आगे पढ़ें

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Blog

Indira Gandhi birth anniversary: आखिर क्या था इंदिरा गांधी के ''गरीबी हटाओ' नारे का पूरा सच?

इंदिरा गांधी ने 1971 के चुनाव में ‘गरीबी हटाओ’के नारे को भुनाया। चुनाव प्रचार में उन्होंने यह कहते हुए आमजन की हमदर्दी बटोरी, ‘वो कहते हैं इंदिरा हटाओ, हम कहते हैं गरीबी हटाओ’।

19 नवंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

टिकट मिलने पर कांग्रेस नेता ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने से रोका, वीडियो वायरल

राजस्थान में कांग्रेस के नेता का अपने समर्थक को 'भारत माता की जय' के नारे लगाने से रोकने का वीडियो वायरल हो रहा है।

19 नवंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree