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'एक शब्द के अर्थ से बदले जिंदगी के मायने'

मनोरंजन ब्यापारी Updated Sat, 08 Sep 2018 01:00 PM IST
Manoranjan Byapari- Writing In West Bengal, Known As The Pioneer Of  Dalit
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किसी को तीन फीट जमीन खोदने से पानी मिल जाता है और किसी को बीस फीट पर थोड़ा पानी मिलता है। मैं किस्मत को इसलिए नहीं मानता, क्योंकि मुझे सौ फीट खोदने पर भी कुछ नहीं मिला।
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पचास के दशक में मेरा जन्म बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में हुआ था। कुछ ही वर्षों बाद मेरा परिवार शरणार्थी के तौर पर भारत आ गया। हमें बस्तर के दंडकारण्य में बसाया गया। पढ़ाई-लिखाई मेरे लिए दूर की बात थी। मुझे बचपन से ही तमाम तरह के काम करने पड़े। किशोरवास्था में गलतीवश मैं नक्सलियों के संपर्क में आ गया। नतीजतन मुझे जेल भी हुई। मैंने जेल में ही पढ़ना सीखा। वहां से छूटने के बाद मैं कोलकाता में रिक्शा चलाने लगा। रिक्शा चलाने के साथ मैंने उपन्यास पढ़ने का शौक पाल लिया।

जब महाश्वेता देवी मेरे रिक्शे पर बैठीं
एक दिन मुझे एक महिला सवारी मिली। वह दिखने में पढ़ी-लिखी लग रही थीं। रास्ते में मैंने उनसे ‘जिजीविषा’ शब्द का अर्थ जानना चाहा। दरअसल कुछ दिनों पहले एक उपन्यास पढ़ते वक्त इस अनजान शब्द से मेरा पाला पड़ा था। महिला के पूछने पर मैंने उन्हें सवाल की वजह बताई। रिक्शे से उतरते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि 'यदि तुम अपनी कहानी के बारे में कुछ लिखना चाहते हो, तो तुम्हारा स्वागत है।' उन्होंने मुझे अपना नाम और पता लिखकर दिया। मैं आश्चर्यचकित था, क्योंकि कागज पर लिखा नाम और रिक्शे की सीट के नीचे रखी किताब की लेखिका का नाम एक था। भले ही यह संयोग था, पर मैं किस्मत को नहीं मानता, क्योंकि किस्मत ने मुझे कुछ नहीं दिया।
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मेरा लेखन गरीबों पर केंद्रित है

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19 नवंबर 2018

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