देश विभाजन: मौलवीजी को अचानक ख्याल आया भगवान तो सभी का एक है

करतार सिंह दुग्गल Updated Sun, 04 Feb 2018 05:55 PM IST
Kartar Singh Duggal- wrote a story at the time of Partition of the country
Katar Singh Duggal
बलौच सिपाही मिल्टरी के ट्रक में मुर्गों की तरह लद गए थे। उनका सामान वैपन-कैरियर में सुबह भेज दिया गया था। हर फौजी के पास सिर्फ अपनी-अपनी बंदूक थी। समय ही कुछ ऐसा था कि बंदूकों पर संगीनें हर समय चढ़ी रहती थीं।
बलौच फौजियों की इस टुकड़ी का सरदार एक रमजान खान नाम का जमादार था, जिसे सभी 'मौलवी जी, मौलवी जी' कहते थे। चलती लारी में जमादार नमाज पढ़ने के लिए खड़े हो जाते। फसादों में लाशों के ढेर के आगे मुस्सला बिछाकर लोगों ने नमाज के समय उन्हें नमाज पढ़ते देखा था। एक सिपाही उनकी दाईं तरफ बंदूक लेकर खड़ा होता और एक सिपाही उनकी बाईं तरफ। देश विभाजन के बाद अमृतसर क्षेत्र से मुसलमानों को निकाल-निकालकर वे पाकिस्तान भेजते।

जली हुई मस्जिदों के सामने लारी रुकवाकर ये रोने लगते। कोई भी मुसलमान ऐसा नहीं रह गया था, जिसे मौलवी ने पाकिस्तान की स्वर्ग-सी जमीन पर न भिजवा दिया हो। जो अपने घरबार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, उन्हें मौलवी जी इस्लामी राज्य के सुंदर चित्र दिखाते और कोई भी उनका कहना टाल न पाता। आज अब मौलवीजी को अचानक ख्याल आया भगवान, तो सभी का एक है।

अमृतसर के हरिमंदिर की नींव एक मुसलमान फकीर ने रखी थी, गुरु नानक को अहले-सुन्नत भी अपना पीर मानते हैं और मौलवी जी ने दूर गुरुद्वारे के चमकते हुए सुनहरे कलशों को देखकर सिर झुका दिया।
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