घर बैठे पक्षी निहारने का आनंद और प्रकृति का सानिध्य

Chandrabhushan Mourya Published by: चंद्र भूषण मौर्य
Updated Sun, 01 Nov 2020 10:10 AM IST
विज्ञापन
पीपल के पेड़ पर फल खाता एक हरियल
पीपल के पेड़ पर फल खाता एक हरियल - फोटो : चंद्र भूषण मौर्य

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
पक्षी नाम सुनते ही जेहन में एक गजब का उत्साह और रोमांच महसूस होने लगता है, ये वो लोग बखूबी समझ सकते हैं, जिन्हें पक्षी निहारने का चस्का लग चुका है। ये एक ऐसा शौक है जो न सिर्फ मन को दुनियादारी से हटाकर सुकून प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति को प्रकृति के करीब लाता है और उससे जुड़ने का एक सुनहरा मौका देता है।
विज्ञापन


मेरे लिए यह शौक ध्यान या योग से कम नहीं है। जब मैं किसी जंगल या पार्क में होता हूं तो मेरी देखने और सुनने की इंद्रियां पूरे मनोयोग से इन पक्षियों की गतिविधियों में खो जाती हैं। इनकी अलग-अलग आवाजें और क्रियाकलाप मन को प्रफुल्लित और आकर्षित करते हैं। इस दौरान अलग-अलग प्रजाति के पक्षियों को सुनते और निहारते काफी सुकूनदायक समय बीतता है। 


मैं लगभग हर सप्ताहांत, किसी जंगल या पार्क में घूमने निकल जाता हूं। इस सैर पर मैं कभी अकेला होता हूं और कभी अन्य पक्षी-प्रेमी मित्रों के साथ होता हूं। पक्षियों को देखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर घूमना मेरे लिए हमेशा एक रोमांचक और आनंददायी अनुभव रहा है।

यह तो हुई घर से बाहर पक्षी निहारने और उससे मिलने वाले आनंद की बात, लेकिन यह तो एक ऐसा शौक है जिसका स्थान, समय और किसी के साथ होने से कोई संबंध नहीं है। इसके लिए किसी का साथ होना, किसी विशेष स्थान पर जाना और किसी विशेष समय पर जाना आवश्यक नहीं है।

आप अकेले, किसी भी स्थान और किसी भी समय इसका आनंद ले सकते हैं। अपने घर की बालकनी या छत पर बैठे हुए भी आप पक्षी निहार सकते हैं। मेरा इस संबंध में काफी अच्छा अनुभव रहा है। 

मैं बीस वर्ष से भी अधिक समय से दिल्ली की सरकारी कॉलोनी में रह रहा हूं। सरकारी कॉलोनी का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां घरों के आसपास अत्यधिक पेड़-पौधे हैं और बीच-बीच में पार्कों के लिए भी स्थान है। इसकी वजह से यहां पक्षियों की काफी अधिकता है।

मेरे घर के आसपास दिखने वाले पक्षियों में प्रमुख हैं गौरैया, तोता, ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन, भारतीय रॉबिन, दर्जिन, कौवा, चील, कबूतर, फाख्ता, हरियल, कोयल, ट्री-पाई, धनेश, छोटा बसंता, बड़ा बसंता, कठफोड़वा, टिटहरी, मैना, बुलबुल, सात-भाई, मुनिया, शकरखोरा, ओरिएंटल व्हाइट-आई, अबाबील आदि। 

सुबह मेरी नींद कई बार किसी पक्षी की आवाज से खुलती है, और वह पक्षी प्राय: ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन होता है, इसके अलावा भारतीय रॉबिन, ओरिएंटल व्हाइट-आई और शकरखोरा भी सुबह की पहली किरण निकलने से पहले ही बोलना शुरू कर देते हैं।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

इसके अलावा मैं अपनी छत के एक कोने में मिट्टी के बर्तन में पक्षियों के लिए पानी रखता हूं...

विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X