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इस वजह से सरकारी स्कूलों से भंग होता है छात्रों-अभिभावकों का मोह

Avinash chandraअविनाश चंद्र Updated Thu, 16 Jan 2020 02:53 PM IST
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नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स इन दिनों राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है।
नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स इन दिनों राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। - फोटो : pixabay
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नीति आयोग द्वारा तैयार किया गया स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स इन दिनों राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि इस इंडेक्स में अप्रत्याशित जैसा कुछ भी नहीं है। यह इंडेक्स पूर्व में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर हुए शोधों और उनके आंकड़ों की एक प्रकार से पुष्टि भर ही करता है। वैसे यह इंडेक्स शिक्षा का अधिकार कानून के उन प्रावधानों की भी कलई खोलता है जो स्कूलों को लर्निंग आऊटकम की बजाए बिल्डिंग और प्ले ग्राउंड के आधार पर मान्यता प्रदान करता है।
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जबकि दुनियाभर के शोध लर्निंग आऊटकम और क्लासरूम के साइज़ के बीच किसी भी प्रकार के संबंध से इंकार करते हैं। नीति आयोग द्वारा जुटाए गए आंकड़ें भी इसकी पुष्टि ही करते हैं। जारी इंडेक्स के मुताबिक, ऐसे राज्यों के सरकारी स्कूलों में भी छात्रों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है जहां इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य सुविधाएं बहुत अच्छी नहीं है।

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, केरल, असम, उत्तराखंड जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं। जबकि ऐसे राज्य जिन्होंने अपने बजट का बड़ा हिस्सा सिर्फ स्कूल भवनों व अन्य सुविधाओं पर खर्च किया है वहां छात्रों के सीखने का स्तर काफी खराब रहा है। शानदार स्कूल बिल्डिंग, स्वीमिंग पूल सहित अन्य सुविधाएं प्रदान कर देशभर में सुर्खियां बटोरने वाली दिल्ली सहित पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

मजे की बात यह है कि तीसरी, पांचवी व आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच भाषा और गणित विषय को लेकर किए गए अध्ययन में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान हर वर्ग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे। जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक फोकस करने वाले दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्य सभी वर्गों में फिसड्डी रहे।

यही कारण है कि गुणवत्ता युक्त शिक्षा की इच्छा रखने वाले छात्रों व अभिभावकों का मोह सरकारी स्कूलों के प्रति भंग होता जा रहा है। गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें निजी स्कूलों में भेजना चाहता है। आरटीई ने इस काम में उनकी खूब मदद भी की है।
 
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