दुनिया में सबसे अलग है भारत का संविधान, हैरान करती है हिंदुस्तान के गणतंत्र बनने की कहानी

Gautam Chaudhary Gautam Chaudhary
Updated Fri, 25 Jan 2019 06:18 PM IST
भारतीय संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर
भारतीय संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर - फोटो : PTI
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अथर्व वेद का यह श्लोक हमें बताता है कि कि हमारे पूर्वजों ने अपने ज्ञान और ओज से जगत के कल्याण के लिए राष्ट्र उत्पन्न किया। मतलब साफ है कि जो लोग यह कहते हैं कि भारत को संगठित करने में अग्रेजों ने अपनी भूमिका निभाई यह सरासर गलत है।
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भारत अनादि काल से एक संगठित राष्ट्र के रूप में स्थित रहा है। राष्ट्र जीवन के इतिहास में भारत में कई मौके आए जब भारत प्रतंत्र हुआ और फिर आजाद हुआ। यहां की संस्कृति को दुनिया की संस्कृति कही जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि यहां दुनियाभर के लोग आए और अपनी-अपनी संस्कृति को यहां स्थापित करने का प्रयास किया लेकिन वे सफल नहीं हो सके अपितु वे यहां की संस्कृति का अंग बनकर रह गए।


कैसे संगठित हुआ भारत और बना संविधान
15 अगस्त सन् 1947 को भारत अंग्रेजों की दास्ता से मुक्त हो गया था। इसके बाद सबसे बड़ी समस्या भारत को संगठित करने की थी। हमारा संविधान बनना था और यह भी तय होना था कि आखिर भारत किस रास्ते चलेगा। हमने अधिनायकवाद को स्वीकार नहीं किया और लोकतंत्र पर भरोसा किया और दुनिया के अभिनव संवैधानिक प्रयोग को अपने देश में स्थापित करने की कोशिश की।

हमारा संविधान बनकर तैयार हो गया और हमारे नेताओं ने आज ही के दिन 26 जनवरी सन् 1950 को हमारा देश पूर्ण रूप से आजाद हुआ यानी हमारे नेताओं ने भारत को पूर्ण गणतंत्र के रूप में घोषित कर दिया।

मतलब आज ही के दिन हमारे देश को नया संविधान मिला था। दरअसल, यह दिन केवल संविधान की स्थापना के लिए ही नहीं जाना जाता है अपितु 1929 में लाहौर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि अगर अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाता, तो भारत अपने को पूर्णत: स्वतंत्र घोषित कर देगा। 26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। इसलिए भी आज के दिन को महत्व दिया जाता है।

आज पूरा देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।

आज पूरा देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।
आज पूरा देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। - फोटो : फाइल फोटो
आज ही के दिन साल 1950 में भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। वहीं 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा की ओर से संविधान अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू कर दिया गया।

26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय राष्ट्र ध्वज को फहराया जाता है। इस अवसर पर हर साल एक भव्य परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन (राष्ट्रपति के निवास) तक राजपथ पर राजधानी, नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना आदि सभी भाग लेते हैं।

परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) जो राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित है पर पुष्प माला डालते हैं। इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री, अन्य व्यक्तियों के साथ राजपथ पर स्थित मंच तक आते हैं, राष्ट्रपति बाद में अवसर के मुख्य अतिथि के साथ आते हैं। परेड में विभिन्न राज्यों की प्रदर्शनी भी होती हैं, प्रदर्शनी में हर राज्य के लोगों की विशेषता, उनके लोक गीत व कला का दृश्यचित्र प्रस्तुत किया जाता है।

पूर्ण स्वराज दिवस
इस दिन सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन 'पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे। इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था। 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ। इस अधिवेशन में पहली बार तिरंगा फहराया गया। 25 नवंबर 1949 को देश के संविधान को मंजूरी मिली। 26 जनवरी 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया।

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को इंडियन स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार 10 बजकर 18 मिनट पर लागू हो गया। लिखित संविधान में कई बार संशोधन होने के बाद इसे अपनाने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। 26 जनवरी 1950 को डॉ.राजेन्द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

इविज़्न स्टेडियम में झंडा फहराया गया। यही पहला गणतंत्र दिवस समारोह था। मुख्य अतिथि थे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो। गणतंत्र दिवस मनाने का वर्तमान तरीका 1955 में शुरू हुआ। इसी साल पहली बार राजपथ पर परेड हुई। राजपथ परेड के पहले मुख्य अतिथि पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे। संविधान में संघ एवं राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन कनाडा के संविधान से लिया गया है। सोवियत संघ के संविधान से मूल कर्तव्य और आस्ट्रेलिया के संविधान से समवर्ती सूची ली गई है।

कैसे तैयार हुआ भारत का संविधान
गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर तिरंगा फहराया जाता है। फिर राष्ट्रगान गाया जाता है और 21 तोपों की सलामी होती है। भारतीय संविधान में आपात उपबंध व्यवस्था जर्मनी के संविधान से ली गई है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनाया गया भारतीय संविधान 395 अनुच्छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ दुनिया में सबसे बड़ा लिखित संविधान था जो और भी विस्तृत हो चुका है।  1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस का समारोह कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ था न कि राजपथ पर।

संविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्व था

महिलाएं जिन्होंने संविधान बनाने में मदद की
महिलाएं जिन्होंने संविधान बनाने में मदद की - फोटो : social media
211 विद्वानों द्वारा 2 महीने और 11 दिन में तैयार भारत के संविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्व था। 26 जनवरी एक विशेष दिन के रूप में चिन्हित किया गया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था। साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गया। वर्ष 1950 से 1970 के दौरान गुट निरपेक्ष आंदोलन और पूर्वी ब्लॉक या कम्युनिस्ट ब्लॉक के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की मेजबानी करवाई गई तो शीत-युद्ध के पश्चात पश्चिम देशों को न्यौता दिया गया।

भारत के आजाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा ने 2 साल, 11 महीने, 18 दिन में भारतीय संविधान का निमार्ण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया, इसलिए 26 नवम्बर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है।

कई सुधार और बदलाव के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किए। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई।

कुल मिलाकर हमारा देश, फिर से अपने पुराने वैभव की ओर बढ़ रहा है। कालांतर में भव्य इमारतें ध्वस्त हो जाती है लेकिन नींव के पत्थर नहीं डिगते। भारत के साथ यही होता रहा है। यहां दुनिया भर से आक्रांता आए, व्यापारी आए, मजदूर और चरवाहे आए। सब ने अपनी संस्कृति और देवता साथ लाए। हर ने कोशिश की कि यहां की संस्कृति पर अपना अधिकार कर लें, लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। समय-समय पर हमारा राष्ट्र प्रभावशाली होता रहा और आधुनिक से आधुनिक बनता चला गया। आज एक बार फिर हमारा राष्ट्र ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है क्योंकि इस राष्ट्र को ऋषियों के तेज और ओज ने पैदा किया है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।आप भी अपने विचार हमें [email protected] पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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