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प्राग यात्रा: एक शहर जिसकी फिजाओं में घुला है इतिहास

Dayashankar shuklaदयाशंकर शुक्ल सागर Updated Thu, 19 Sep 2019 04:37 PM IST
प्राग के 'ओल्ड टाउन स्क्वायर' को प्राग का दिल कहते हैं।
प्राग के 'ओल्ड टाउन स्क्वायर' को प्राग का दिल कहते हैं। - फोटो : Amar Ujala
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इस वक्त रात के कोई साढ़े बारह बजे हैं। लेकिन प्राग शहर का यह मध्यकालीन हिस्सा नीम अंधेरे में भी धड़क रहा है, शायद इसलिए प्राग के 'ओल्ड टाउन स्क्वायर' को प्राग का दिल कहते हैं। बारहवीं सदी का यूरोप यहां जीवन्त है।
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ये स्क्वायर सैलानियों की भीड़ को हमेशा से आकर्षित करता रहा है। पुरानी ऊंची इमारतों के बीच एक दूसरे को काटती, चौड़ी शानदार गलियां। उन पर पहाड़ी चट्टानों को तराशकर बिछाई गई टाइल्स की एक लम्बी श्रृंखला। ऊपर खम्बों पर टंगी पीली रोशनियां, उन गलियों को और भी रहस्यमय बना रही हैं।

गोथिक कैथेड्रल और पुराने चर्च की चमकीली दीवारें इस रहस्य को और गहरा देती हैं। काले लिबास में एक दुबली-पतली खूबसूरत-सी टूरिस्ट गाइड हाथ में जलती हुई लालटेन लेकर आगे चल रही है। उसके चेहरे का आधा हिस्सा लंबे काले कोट के हुड से ढका है और उसके पीछे टूरिस्टों का एक छोटा-सा दल है।

टूरिस्ट गाइड कहानी शुरू करती है- "यहां वो खूबसूरत बला रहती थी''
"इस लालटेन की रोशनी के पीछे चलते रहिए।" वह गहरे लिपस्टिक लगे होटों से धीमी, लेकिन रहस्यमय आवाज में अंग्रेजी में बुदबुदाती है। वह दल खामोशी से उसके पीछे हो लेता है। वह अंधेरे में डूबे काली नुकीली मीनारों के बने टाइन चर्च के किनारे की एक इमारत के पास जाकर ठहर जाती है। "ये बेसमेंट आप देख रहे हैं।"

टूरिस्ट गाइड लालटेन नीचे रखकर कहानी शुरू करती है- "यहां वो खूबसूरत बला रहती थी। पूरा प्राग उसके सौंदर्य का दीवाना था। लेकिन वह किसी से प्रेम नहीं करती थी, सिवाए खुद के। लेकिन एक दिन उसे एक युवा तुर्क व्यापारी से उसे प्रेम हो गया।

ये पहली नजर का प्यार था। दोनों मिलने लगे। और एक दिन विदाई का वक्त आ गया। जाते वक्त उस तुर्क ने कहा- मैं वापस आऊंगा, तुम मेरा इंतजार करना। चाहे कितना वक्त क्यों न बीत जाए। मैं आऊंगा जरूर।

दिन, महीने और साल बीतने लगे। वह सुंदरी उदास रहने लगी। फिर एक स्थानीय युवक उसकी जिंदगी में आया। दोनों में प्रेम हुआ। दोनों की शादी इसी चर्च में होनी थी। लेकिन ठीक शादी के दिन वह तुर्क वहां पहुंच गया। वह उससे अंतिम बार बात करना चाहता था। तुर्क उसे तहखाने के एक अलग कमरे में ले गया। फिर क्या हुआ किसी को नहीं मालूम।

"यूरोपीय देशों की टूरिस्ट महिलाएं सांस रोके ये कहानी सुन रही हैं। उस खूबसूरत गाइड ने नाटकीय शक्ल बनाते हुए कहानी को क्लाइमेक्स तक ले गई-"फिर वे दोनों कभी, किसी को नहीं दिखे। उन्हें साथ जाते किसी ने नहीं देखा। उन दोनों के शव भी कहीं नहीं मिले। उन दोनों का क्या हुआ ये आज तक किसी को नहीं मालूम। लेकिन प्यार में डूबे उस स्थानीय युवक ने इस टाइन चर्च की ऊंची मीनार से कूदकर जान दे दी। तब यहां पुराना चर्च हुआ करता था। वह अभिशप्त हो गया। उसी जगह यह नया चर्च बनाया गया। लेकिन उसकी आत्मा यहां आज भी भटकती है।"

मैं मुड़ कर देखता हूं चर्च के दक्षिणी कोने में एक दूसरा टूरिस्ट गाइड सिर तक काले लिबास में अपने साथ के सैलानी दस्ते को इसी तरह के झूठे-सच्चे किस्से सुना रहा है। उसके हाथ में भी एक जलती हुई लालटेन है। शायद ये यहां के टूरिस्ट गाइड का ड्रेस कोड है जो पूरे वातावरण को और दिलचस्प बनाता है।
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