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Meri Aadat Hai

काव्य

अपने दिल की करते जाना मेरी आदत है

Nirbhay Raj

2 कविताएं

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काँटों से दामन उलझाना मेरी आदत है
दिल में पराया दर्द बसाना मेरी आदत है

मेरा गला गर कट जाए तो तुझ पर क्या इल्ज़ाम
हर क़ातिल को गले लगाना मेरी आदत है

जिनको दुनिया ने ठुकराया जिन से हैं सब दूर
ऐसे लोगों को अपनाना मेरी आदत है

सबकी बातें सुन लेता हूं मैं चुपचाप मगर
अपने दिल की करते जाना मेरी आदत है

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