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इसलिए कांग्रेस-भाजपा पर निशाना साध रही है मायावती, ये है रणनीति

Ramesh sarafरमेश सर्राफ Updated Wed, 22 Jan 2020 09:48 AM IST
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मायावती पार्टी के खिसकते जनाधार को लेकर चिंतित है।
मायावती पार्टी के खिसकते जनाधार को लेकर चिंतित है। - फोटो : अमर उजाला
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बसपा सुप्रीमो मायावती इन दिनों कांग्रेस पार्टी पर आग बबूला हो रही है। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पिछले सप्ताह दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए बुलाई गई बैठक में भाग नहीं लिया था।
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मायावती का कहना था कि कांग्रेस पार्टी एक तरफ तो विपक्षी दलों को एक साथ कर उनका नेतृत्व करना चाहती है। वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की रणनीति पर काम करती रहती है। इसी कारण उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बैठक का बहिष्कार किया था।

मायावती ने बताया कि उन्होंने 10 साल तक केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार को बिना किसी शर्त के बाहर से समर्थन दिया था। इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक व अन्य जहां कहीं  भी कांग्रेस को जरूरत थी उनकी पार्टी ने बिना शर्त समर्थन दिया। लेकिन कांग्रेस पार्टी को जब भी मौका मिलता है वह बहुजन समाज पार्टी के विधायकों को तोडक़र पार्टी को कमजोर करने का प्रयास करती है।

मायावती ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देकर उनकी सरकार बनवाने में पूरी मदद की थी। मगर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनकी पार्टी के सभी 6 विधायकों को दलबदल करवाकर कांग्रेस में शामिल करवा लिया जो बसपा के मतदाताओं के साथ विश्वासघात है।

इतना ही नहीं गहलोत के इशारे पर ही उनकी पार्टी के राष्ट्रीय कोर्डिनेटर व राजस्थान प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम व राजस्थान प्रदेश संयोजक सीताराम मेघवाल का बसपा कार्यालय में मुंह काला कर जूतों की माला पहना गधों पर बिठा कर जूलुस निकाल कर बसपा की छवि खराब करने का प्रयास किया गया था। जिसके पीछे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ही हाथ था।

गहलोत ने 2008 में भी उनकी पार्टी के सभी 6 विधायकों को तोड़कर कांग्रेस में शामिल करवाया था। इस तरह बार-बार कांग्रेस द्वारा उनके विधायकों को तोडक़र उनके जनाधार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

मायावती ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को भी अपने निशाने पर ले रखा है। उन्होंने राजस्थान में कोटा के एक सरकारी अस्पताल में एक माह में 110 नवजात शिशुओं की मौत पर भी सवाल उठाते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में तो प्रियंका गांधी छोटी-छोटी बातों पर धरना देने पर उतारू हो जाती हैं। जबकि राजस्थान में उनकी पार्टी की सरकार में इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी वह जयपुर जाकर लौट आई। उन्होंने कोटा जाकर पीडि़त परिवारों से मिलना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने प्रियंका गांधी की ऐसी दोहरी नीति की भी आलोचना की।

आखिर किस रणनीति पर काम कर रही है मायावती 
बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती इन दिनों अपना राजनीतिक जनाधार बचाने को संघर्ष कर रही है। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक तरह से उनकी पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया था, तब बसपा को मात्र 19 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था।

उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती को ऐसी स्थिति का सामना तो बसपा के प्रारंभिक काल में भी नहीं करना पड़ा था। अपने खिसकते जनाधार को बचाने के लिए ही 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती को अपनी चिर प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लडऩा पड़ा था। उस चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में 10 सीटें जीतने में सफल रही थी। जबकि समाजवादी पार्टी को मात्र 5 सीट ही मिली थी।
 
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