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इन कानूनों से ही संभव है महिला अधिकारों की सुरक्षा

Veena Nagpalवीना नागपाल Updated Sat, 13 Jul 2019 06:50 PM IST
महिला अधिकारों को लेकर पहले संसद में खूब बहस हुई थी।
महिला अधिकारों को लेकर पहले संसद में खूब बहस हुई थी। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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महिला अधिकारों को लेकर पिछली संसद में भी खूब बहस हुई थी और तब चुनाव आ गया इसलिए महिला अधिकारों को लेकर जो ठोस कदम सरकार द्वारा उठाए जाने चाहिए थे वह वहीं के वहीं थम गए अर्थात् उन्हें कानूनी जामा न पहनाया जा सका। यह अधिकार ऐसे थे जिन पर केवल बहस में ही समय जाया नहीं किया जाना चाहिए था बल्कि इन पर तुरंत एक्शन लिया जाकर इन्हें कानूनी जामा पहना दिया जाना आवश्यक था।
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तीन मुख्य बिल थे- सरोगेसी (किराये की कोख), महिला तथा बच्चियों की तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग), ट्रासजेंडर्स (उभयलिंग व्यक्तियों) से संबंधित कानून। तीनों ही समाज के लिए बहुत आवश्यक है और इनसे महिलाओं की सुरक्षा मुख्य रूप से जुड़ी हुई है। सरोगेसी के लिए बिल तो प्रस्तुत हुआ पर वह कानून नहीं बना है। उसमें कुछ ऐसे बिंदु भी हैं जिन पर कई पक्षों को आपत्ति है।

उदाहरणत: उसमें कहा गया है कि सरोगेसी कोई व्यापार नहीं है, जिस तरह बाजार में जाकर कोई मनपसंद वस्तु खरीद ली जाती है उस तरह किराए की कोख किराए पर नहीं ली जा सकती है, इसलिए ही बिल में कहा गया है कि अपनी निकट संबंधी महिला की इसमें सहायता ली जा सकती है। लेकिन किसी पराई महिला के कुछ धन राशि चुकाकर उससे किराए की कोख लेकर संतान प्राप्त करना अपराध माना गया तथा साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि कोई महिला अपने कोख का व्यापार करती है तो उसे भी अपराधी माना जाएगा।

 
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